उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय परिसर के भीतर बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने रातभर चली कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद की गई। प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण के रूप में पाई गई थी।
मामले में मस्जिद कमेटी पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कार्रवाई के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है।
इकरा हसन ने लगाया नजरबंदी का आरोप
कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने दावा किया कि मस्जिद गिराए जाने के मामले में अधिकारियों से मिलने और स्थानीय लोगों की चिंताओं को उठाने के लिए सहारनपुर जाने की तैयारी के दौरान उन्हें उनके कैराना स्थित आवास पर नजरबंद कर दिया गया।
हसन के अनुसार, उनके घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और उन्हें सहारनपुर जाने से रोक दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों से मुलाकात करना किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए अपराध है। सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का काम लोगों की आवाज उठाना है और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
शिकायत के बाद हुई मस्जिद पर कार्रवाई
मस्जिद को गिराने की कार्रवाई बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय समन्वयक विकास त्यागी की शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि DM कार्यालय परिसर के भीतर सरकारी जमीन पर मस्जिद का अवैध निर्माण किया गया है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि परिसर में मौजूद कुछ स्थानों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इनमें पोस्ट ऑफिस और बाहरी लोगों को किराए पर दिए गए कमरों का भी उल्लेख किया गया था। आरोप था कि मस्जिद कमेटी इन कमरों से किराया वसूल रही थी।
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण
मामले की सुनवाई के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने संबंधित ढांचे को गिराने का आदेश दिया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी परिसर में कथित अतिक्रमण और उससे जुड़ी गतिविधियों के कारण सरकारी कार्यालय की सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े सवाल खड़े हो रहे थे।
इसी आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई को आवश्यक बताया।
समाजवादी पार्टी ने सरकार पर साधा निशाना
मस्जिद गिराए जाने और इकरा हसन को कथित तौर पर रोके जाने को लेकर समाजवादी पार्टी ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा।
पार्टी का आरोप है कि हसन को सहारनपुर जाने से इसलिए रोका गया ताकि वह मौके पर जाकर मस्जिद गिराए जाने का मुद्दा न उठा सकें।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और उसकी उपलब्धि होनी चाहिए।
धार्मिक ढांचों पर कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद
सहारनपुर की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में सरकारी या कथित अतिक्रमित जमीन पर बने धार्मिक ढांचों के खिलाफ की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर जारी व्यापक बहस के बीच सामने आई है।
ऐसी कार्रवाइयों को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद भी सामने आते रहे हैं। इनमें ध्वस्तीकरण से पहले न्यायिक आदेशों, संबंधित पक्षों को उचित प्रक्रिया का अवसर और सुरक्षा मानकों के पालन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।
फिलहाल सहारनपुर मामले में प्रशासन की कार्रवाई और सांसद इकरा हसन के नजरबंदी के दावे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।







