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कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, सामने आईं हादसे की वजहें

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admin
19 अक्टूबर 2026 | 11:00 am IST
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कोलकाता में सप्तमी की शाम हुई बारिश के बीच चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मचने की घटना सामने आई। हादसे में 19 लोगों की मौत होने की खबर है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, संकरी गलियां, प्रवेश और निकास द्वारों पर भीड़ का दबाव, व्यवस्था में कथित कमी और पंडाल के ढांचे को लेकर की गई घोषणा ने हालात बिगाड़ने में भूमिका निभाई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

स्थानीय पुलिस के शुरुआती बयानों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई परिस्थितियां एक साथ पैदा हुईं, जिससे दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।

शाम करीब 7:30 बजे मची भगदड़

यह घटना शनिवार शाम करीब 7:30 बजे उत्तर कोलकाता के चोरबागान स्थित लोकप्रिय दुर्गा पूजा पंडाल में हुई। यह स्थान हावड़ा ब्रिज से दो किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। यहां शहर के पुराने और चर्चित दुर्गा पूजा आयोजनों में से एक आयोजित किया जाता है।

घटना के बाद मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में विशेष जांच दल गठित करने की घोषणा की। वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया कि आयोजकों को बचाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का दावा है कि आयोजकों में से कई लोग सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

बारिश से बचने के लिए पंडाल में बढ़ी भीड़

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब एक घंटे तक हुई बारिश के दौरान श्रद्धालु उससे बचने के लिए पंडाल के भीतर जाने लगे। जो लोग पहले से अंदर मौजूद थे, वे बारिश के कारण बाहर निकलने से बच रहे थे। इसी बीच प्रवेश और निकास के रास्तों पर लोगों की आवाजाही जारी रही।

बताया जा रहा है कि कुछ ही समय में भीड़ का दबाव बढ़ गया और लोग एक-दूसरे से टकराकर गिरने लगे। इसके बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

मौके पर मौजूद विनय कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि लगातार बारिश और अत्यधिक भीड़ के कारण स्थिति बिगड़ी। उनके मुताबिक, पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद था, लेकिन बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी उत्तम ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवक व्यवस्था संभालने में जुटे थे। उनके अनुसार, स्थानीय जनप्रतिनिधि भी घायलों को अस्पताल पहुंचाने और उपचार की व्यवस्था में मदद कर रहे थे।

संकरी गली और छोटे गेट बने चुनौती

मौके से सामने आए वीडियो में पंडाल के प्रवेश और निकास द्वारों के साथ वहां तक पहुंचने वाली सड़क भी संकरी दिखाई देने की बात कही गई है। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

एक पुलिस अधिकारी ने भी पंडाल तक पहुंचने वाली संकरी सड़क को हादसे की संभावित वजहों में शामिल बताया। पीटीआई को दिए बयान में अधिकारी के अनुसार, कथित कुप्रबंधन के कारण भगदड़ के दौरान लोगों ने प्रवेश द्वार से बाहर निकलने की कोशिश की। दोनों गेट और पंडाल तक पहुंचने वाली सड़क संकरी होने से स्थिति और बिगड़ सकती थी।

घोषणाओं से श्रद्धालुओं में भ्रम का आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि प्रवेश, निकास और लोगों की आवाजाही को लेकर की गई घोषणाओं के कारण श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उनका कहना है कि भीड़ बढ़ने के दौरान लोगों को स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिल पाए, जिससे अफरा-तफरी बढ़ गई।

स्थानीय निवासी संघमित्रा भौमिक ने दावा किया कि इस वर्ष उन्होंने पंडाल में पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी नहीं देखी। उनके मुताबिक, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था में कमी के कारण हालात बिगड़ सकते थे।

कुछ लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासन की सहायता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकेगी।

जांच में सामने आएंगे हादसे के कारण

चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई इस घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संकरी सड़कों, सीमित प्रवेश-निकास मार्गों और बारिश के दौरान लोगों की आवाजाही जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल, हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच की जरूरत है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भगदड़ किन कारणों से हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।