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शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 928 और निफ्टी 274 अंक टूटा

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admin
19 अक्टूबर 2026 | 03:41 pm IST
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पिछले सप्ताह शेयर बाजार में अच्छी तेजी के बाद सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ गई। बैंकिंग शेयरों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर कारोबार करने लगे। बाजार में गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 4.68 लाख करोड़ रुपये घट गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

सोमवार दोपहर 1:57 बजे तक सेंसेक्स 928 अंक यानी 1.24 प्रतिशत गिरकर 73,801.07 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 274 अंक यानी 1.19 प्रतिशत टूटकर 22,871.80 पर आ गया। इस गिरावट के बाद बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 468 लाख करोड़ रुपये रह गया।

बिकवाली का दबाव केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और मझोले शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।

बैंकिंग शेयरों में गिरावट से बढ़ा दबाव

बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में बैंकिंग शेयरों की कमजोरी शामिल रही। एक्सिस बैंक के शेयर करीब 5 प्रतिशत तक गिर गए। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 7,003 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, लेकिन यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से कम रहा।

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। बैंक का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 18,641 करोड़ रुपये था। इस तरह मुनाफे में करीब 4.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक और यस बैंक के शेयर भी 1 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ गए।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता

विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 1,166 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

हालांकि, अक्टूबर में अब तक 11 कारोबारी सत्रों में से 9 सत्रों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। लगातार हो रही निकासी से बाजार में तेजी को मजबूती मिलने में मुश्किल आ रही है।

107 डॉलर के पार कच्चा तेल

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक गिरने के बावजूद 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रही थी। वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस पर व्यापक प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इस फैसले के आर्थिक प्रभाव का आकलन करने में 60 दिन तक लग सकते हैं। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने भी कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।

वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 0.64 प्रतिशत गिरा, जबकि इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके विपरीत दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2 प्रतिशत चढ़ा।

इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई थी। नैस्डैक 2 प्रतिशत से अधिक और एसएंडपी 500 एक प्रतिशत से ज्यादा नीचे बंद हुआ था।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, पिछले सप्ताह निफ्टी में 2.8 प्रतिशत की तेजी और बड़ी कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं। हालांकि, महंगा कच्चा तेल अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

हालिया तेजी के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली भी बाजार पर दबाव डाल रही है। मंगलवार को बाजार बंद रहने से पहले निफ्टी के वायदा सौदों की समाप्ति को लेकर भी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।

ऐसे में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर बनी रहेगी।