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MMDR Act में बदलाव की तैयारी, नया खनन कानून बनाएगी केंद्र सरकार

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admin
18 अक्टूबर 2026 | 02:17 pm IST
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केंद्र सरकार खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों को अधिक सरल, प्रभावी और समयानुकूल बनाने के उद्देश्य से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 यानी MMDR एक्ट में व्यापक बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसके तहत मौजूदा कानून की समीक्षा कर उसे नए स्वरूप में ढालने और एक व्यापक एवं सुव्यवस्थित खनन कानून तैयार करने की योजना है। इसका उद्देश्य कारोबार सुगमता बढ़ाने के साथ आम लोगों के जीवन को भी आसान बनाना है।

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, खान मंत्रालय इस कानून की समीक्षा की तैयारी कर रहा है। बदलती जरूरतों के अनुरूप MMDR एक्ट में समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं, लेकिन अब खनन क्षेत्र की मौजूदा आवश्यकताओं, तकनीकी प्रगति और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इसे व्यापक रूप से नए सिरे से तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।

अंतर-मंत्रालयी समिति करेगी कानून की समीक्षा

प्रस्तावित नए खनन कानून का मसौदा तैयार करने के लिए खान मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की जाएगी। यह समिति मौजूदा अधिनियम के सभी प्रमुख प्रावधानों की समीक्षा करेगी और आवश्यक बदलावों का सुझाव देगी।

समिति अन्य देशों में अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का भी अध्ययन करेगी। इसके आधार पर यह विचार किया जाएगा कि किन प्रावधानों को भारत के प्रस्तावित खनन कानून में शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा, खनन क्षेत्र में भविष्य में होने वाले बदलावों और उभरती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए प्रावधान सुझाए जाएंगे। कानून की भाषा को सरल बनाने, संबंधित कानूनों के साथ तालमेल स्थापित करने और संवैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप बदलाव करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

राज्य सरकारों और हितधारकों से होगा परामर्श

नए विधेयक का मसौदा तैयार करने से पहले समिति विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेगी। इस प्रक्रिया में राज्य सरकारों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि खनन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों की जरूरतों और व्यावहारिक समस्याओं को समझा जा सके।

परामर्श के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रस्तावित कानून को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र के नियमन को सुव्यवस्थित करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में खनन क्षेत्र की अहम भूमिका

खनन एवं खनिज क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, तकनीकी विकास की जरूरतों को पूरा करने और राष्ट्रीय रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी इस क्षेत्र की अहम भूमिका होगी।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, व्यवस्थित विकास और नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है।

क्या है MMDR एक्ट और कैसे करता है काम?

खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 देश में खानों और खनिजों के विकास एवं नियमन से संबंधित प्रमुख केंद्रीय कानून है। यह केंद्र सरकार को जनहित में खनन गतिविधियों को नियंत्रित करने तथा खनिज संसाधनों के संरक्षण और व्यवस्थित विकास के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है।

यह कानून प्रमुख खनिजों और गौण खनिजों के नियमन में अंतर करता है। प्रमुख खनिजों के नियमन में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जबकि गौण खनिजों का नियमन मुख्य रूप से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

खनिज पट्टे और रॉयल्टी के नियम

MMDR एक्ट के तहत खनिज रियायतें, जैसे पूर्वेक्षण लाइसेंस और खनन पट्टे, निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार जारी किए जाते हैं। इनमें राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और संबंधित मामलों में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों तथा नीलामी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

वहीं, खनिजों पर रॉयल्टी की दरें तय करने में केंद्र सरकार की भूमिका रहती है।

प्रस्तावित नए कानून के जरिए इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर उन्हें अधिक सरल और प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। हालांकि, नए कानून का अंतिम स्वरूप समिति की समीक्षा, हितधारकों से परामर्श और सरकार के आगे के फैसलों के बाद ही स्पष्ट होगा।