ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने भारत को सलाह दी है कि वह अमेरिका से मिली अस्थायी शुल्क राहत के बदले स्थायी व्यापारिक रियायतें न दे। थिंक टैंक के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले से रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का संभावित खतरा टल गया है। हालांकि, यह राहत अस्थायी है और वाशिंगटन भविष्य में इन शुल्कों को दोबारा लागू कर सकता है।
अमेरिकी शुल्क नीति से बनी अनिश्चितता
GTRI ने कहा कि एसआरआईए कानून लागू रहने के कारण अमेरिका के पास द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में रियायतें हासिल करने के लिए शुल्क लगाने की धमकी देने का विकल्प मौजूद है। इससे भारत और अन्य देशों के लिए अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
थिंक टैंक के अनुसार, अमेरिका पहले दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी देता है और बाद में परिस्थितियों के अनुकूल न होने पर पीछे हट सकता है। ऐसे में भारत को अस्थायी राहत के आधार पर दीर्घकालिक व्यापारिक प्रतिबद्धताएं करने से बचना चाहिए।
रूसी तेल आयात में घटी हिस्सेदारी
GTRI के मुताबिक, भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई में 51 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 44 प्रतिशत रह गई। इस दौरान भारत ने ऊंची कीमतों के बावजूद अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तेल की खरीद बढ़ाई।
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी छूट से भारत को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इससे स्थायी सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करते हुए व्यावसायिक शर्तों के आधार पर तेल खरीदना चाहिए और भविष्य में अमेरिकी दबाव से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।
अमेरिका के फैसलों पर उठाए सवाल
श्रीवास्तव ने अमेरिकी नीति में विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा कि एसआरआईए 18 सितंबर को कानून बना, जबकि 9 अक्टूबर को अमेरिका ने खुद रूसी डीजल खरीदने के लिए समझौता कर लिया। उनके अनुसार, इससे दूसरे खरीदारों को दंडित करने की अमेरिकी नीति पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने हितों के अनुसार तय करता है कि दंडात्मक कदम कब लागू किए जाएं। चीन अमेरिकी दबाव का मुकाबला कर सकता है, लेकिन भारत को भी यह स्पष्ट करना होगा कि उस पर दबाव बनाने की कीमत चुकानी पड़ सकती है। ऐसा नहीं होने पर भारत को बार-बार अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह
GTRI का कहना है कि भारत को अस्थायी शुल्क राहत के बदले स्थायी व्यापारिक रियायतें देने से बचना चाहिए। देश की ऊर्जा जरूरतों, तेल की कीमतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए, ताकि अमेरिकी नीतिगत बदलावों के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक हित सुरक्षित रहें।







