द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के संसदीय दल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके आचरण की जांच कराने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
यह प्रस्ताव DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ के मुरासोली मारन मीटिंग हॉल में आयोजित सांसदों की बैठक में पारित किया गया। बैठक में कुल चार प्रस्ताव अपनाए गए।
SIR प्रक्रिया को लेकर DMK का विरोध
DMK लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करती रही है। पार्टी का विरोध बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की खबरों के बाद तेज हुआ था।
जुलाई 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एम.के. स्टालिन ने इस प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाई थी। DMK की उपमहासचिव और संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि के साथ उन्होंने बिहार में आयोजित ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ में भी हिस्सा लिया था।
पार्टी के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयोग ने तमिलनाडु समेत 12 राज्यों में SIR लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद स्टालिन ने आशंका जताई कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस प्रक्रिया को तमिलनाडु तक ले जाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
DMK ने SIR की समय-सीमा और प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का तर्क है कि नवंबर और दिसंबर के दौरान मानसून तथा त्योहारों के कारण मतदाताओं के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाना और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल हो सकता है।
स्टालिन और पार्टी के सांसदों ने संसद तथा अन्य मंचों पर इस मुद्दे को उठाते हुए आशंका जताई कि SIR के कारण पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं। DMK का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करते समय किसी भी नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
चुनावी नतीजों के बाद भी आयोग पर निशाना
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद 15 नवंबर को एम.के. स्टालिन ने विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे से जुड़े विवादों और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अलग चुनाव लड़ने के प्रभाव का उल्लेख किया था।
उन्होंने कांग्रेस को गठबंधन से जुड़े मतभेदों को सुलझाने की सलाह दी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन की समस्याओं के आधार पर चुनाव आयोग की कथित गलतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता। स्टालिन ने चुनाव आयोग पर जनता के भरोसे में कमी आने का दावा भी किया।
DMK के प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि अन्य चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने ऐसे फैसले लिए, जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए। पार्टी ने उनके खिलाफ उचित जांच कराने और उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
छात्र संगठनों के प्रदर्शनों को समर्थन
बैठक में पारित एक अन्य प्रस्ताव के तहत DMK ने SIR के विरोध में छात्र संगठनों और लोकतांत्रिक समूहों की ओर से आयोजित प्रदर्शनों को समर्थन देने का फैसला किया।
पार्टी ने कहा कि स्टालिन ने इस मुद्दे पर शुरुआत से ही विरोध जताया है और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की है। स्टालिन ने चुनाव आयुक्त पर संविधान की अनदेखी करने और मनमाने तरीके से काम करने के आरोप भी लगाए हैं।
DMK का रुख है कि SIR प्रक्रिया समाप्त की जानी चाहिए और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाना चाहिए। पार्टी ने इन मांगों के समर्थन में लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित विरोध प्रदर्शनों में शामिल संगठनों को अपना समर्थन देने की बात कही है।
हालांकि, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ DMK की ओर से लगाए गए आरोप पार्टी के दावे हैं। प्रस्ताव पारित होने से अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त पद से नहीं हटते; इसके लिए निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।







