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आज की कहानी:रंगों से पहले मन को रंगो

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admin
11 मार्च 2026 को 05:18 am बजे
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“कश्तियाँ उन्हीं की डूबती हैं, जिनके ईमान डगमगाते हैं…” — यह पंक्ति अक्सर गाँव के बुजुर्ग हरिराम जी अपने शिष्य गुरु को सुनाया करते थे। होली का समय था। पूरा गाँव रंगों की तैयारी में लगा था, लेकिन गुरु के मन में रंगों की जगह कड़वाहट भरी हुई थी।

कुछ दिनों पहले उसके सबसे अच्छे मित्र विवेक ने गुस्से में आकर उसे सबके सामने अपमानित कर दिया था। गुरु के मन में बदले की आग जल रही थी। वह सोच रहा था कि इस होली पर वह विवेक को सबक सिखाएगा।

होली की पूर्व संध्या पर जब गाँव में होलिका दहन की तैयारी हो रही थी, तब हरिराम जी ने गुरु को पास बुलाया। उन्होंने कहा, “बेटा, होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, यह मन को पवित्र करने का पर्व है। होली का असली अर्थ है—जो बीत गया, उसे जला दो। अगर मन में ईर्ष्या, क्रोध और बदले की भावना रहेगी तो जीवन की कश्ती डगमगाएगी।”

गुरु चुपचाप सुनता रहा। हरिराम जी ने आगे कहा, “जिसके दिल में नेकी होती है, उसके आगे मंज़िल भी सिर झुकाती है। आत्मा की ताकत शुद्ध विचारों से बढ़ती है। अगर तुम अपने मन को पवित्र कर लोगे, तो तुम सच्ची होली मनाओगे।”

रात को होलिका दहन के समय गुरु ने लकड़ियों की आग को ध्यान से देखा। उसे लगा जैसे उसकी नफरत भी उसी आग में जल रही हो। उसने मन ही मन संकल्प लिया कि वह पुरानी बातों को छोड़ देगा।

अगली सुबह गाँव में रंगों की धूम मची हुई थी। बच्चे, बूढ़े, सभी एक-दूसरे को रंग लगा रहे थे। गुरु ने थोड़ी देर सोचा, फिर रंग की पिचकारी लेकर सीधे विवेक के घर पहुँचा। विवेक उसे देखकर झिझक गया। शायद वह भी पिछले व्यवहार के लिए शर्मिंदा था।

गुरु ने मुस्कुराकर कहा, “होली है! जो बीत गया, सो बीत गया।” और उसने प्यार से विवेक के गाल पर रंग लगा दिया। विवेक की आँखों में आँसू आ गए। उसने भी गुरु को गले लगा लिया और बोला, “मुझे माफ़ कर दो, दोस्त।”

दोनों मित्रों का गले मिलना देखकर आसपास खड़े लोग भी भावुक हो उठे। उस दिन गुरु ने समझ लिया कि सच्ची जीत बदला लेने में नहीं, बल्कि क्षमा करने में है।

शाम को जब गुरु ने हरिराम जी को यह सब बताया, तो वे मुस्कुराए और बोले, “देखा बेटा, ईमान और नेकी से ही जीवन की कश्ती पार लगती है। आज तुमने अपने मन को रंगा है, इसलिए तुम्हारी होली सफल हुई।”

उस दिन गुरु ने महसूस किया कि रंगों से ज्यादा जरूरी है मन की सफाई। जब दिल में नेकी और विचारों में पवित्रता होती है, तो मंज़िलें खुद रास्ता बना देती हैं।

सच ही कहा गया है—कश्तियाँ उन्हीं की डूबती हैं, जिनके ईमान डगमगाते हैं। और जिनके दिल में सच्चाई और नेकी होती है, उनके जीवन में हर दिन होली के समान उज्ज्वल और रंगीन होता है।

मेरे और मेरे परिवार कि ओर से रंगपंचमी कि हार्दिक शुभकामनाए….