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ECI में मतभेद की खबर पर घमासान, आयोग बोला- अंतिम फैसले सर्वसम्मति से

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admin
24 सितंबर 2026 | 11:31 am IST
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नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े फैसलों और प्रशासनिक निर्देशों पर कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटा तक पहुंच से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है।

ECI ने क्या कहा?

रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार और टिप्पणियां होना संस्थागत विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। ECI ने स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव सुधार और मतदाता सूची के संशोधन से जुड़ी करीब 40 नई पहल की गई हैं।

किन मुद्दों पर उठे सवाल?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मुख्य रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े विषयों पर थीं। रिपोर्ट में Form-6 में किए गए बदलाव और मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने चुनावी डेटा तक संबंधित अधिकारियों की पहुंच और उसके प्रबंधन को लेकर भी चिंता दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय संस्थागत प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति से लिए गए।

विपक्ष ने उठाए सवाल

रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आयोग पर अपने पहले के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोप दोहराए हैं। वहीं, भाजपा की ओर से आयोग के भीतर होने वाले विचार-विमर्श को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

विवाद के केंद्र में SIR और मतदाता सूची

पूरे मामले के केंद्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता, SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया है। रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों और आयोग के सर्वसम्मति से फैसले लेने के दावे के बीच अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि आयोग के भीतर विचार-विमर्श किस तरह हुआ और अंतिम फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए।

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