दुनिया में ईश्वर एक ही है, मुझे क्या लेना है हजारों से।
भगवान विष्णु जी का यह भजन भक्तों को ईश्वर की एकता, भक्ति और हरि-सुमिरन का संदेश देता है। इस भजन को आप भगवान विष्णु जी की पूजा-अर्चना के दौरान गा या सुन सकते हैं।
।। विष्णु जी का भजन – Lord Vishnu Bhajan ।।
दुनिया में ईश्वर एक ही है, मुझे क्या लेना है हजारों से।
अनहद की धुन बजे घट में, उसे क्या लेना है नगाड़ों से।।
घट-घट में भगवान का वास
घट भीतर भगवान बसे, संसार के विषयों की चाह नहीं।
है समदृष्टि सबके भीतर, उसे सुख-दुःख की परवाह नहीं।।
आना-जाना जग की रीति है, तुम सीखो बसंत बहारों से।
यहां संग नहीं चलता कोई, तुम मिलते लोग हजारों से।।
मोह-माया से दूर रहने का संदेश
कोई रहता एक अकेले में, नहीं पड़ता जग के झमेलों में।
कोई मोह-माया में बंधकर के, रहता है जग के मेले में।।
सांसारिक रिश्तों से ऊपर प्रभु भक्ति
मत करना विश्वास कभी, यहां लोग सभी हैं मतलब के।
स्वार्थहित रिश्ते जोड़ रहे सब, प्रीति कर ले तू रब से।।
हरि सुमिरन ही सच्चा सहारा
कहे सदानंद, सांची सुन लो, यह हरि-सुमिरन की बेला है।
संग कर्म चले अपने-अपने, और कहां गुरु, कहां चेला है।।
यह भजन भगवान विष्णु की भक्ति, हरि-सुमिरन और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर प्रभु से प्रेम करने का संदेश देता है।







