दिल्ली के पूर्व विधायक और 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए पैरवी करने वाले एचएस फूलका ने बीजेपी सांसदों कमलजीत सहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी और योगेंद्र चंदोलिया के कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार के घर जाने पर आपत्ति जताई है। तीनों सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके परिवार से मिलने और शोक व्यक्त करने पहुंचे थे।
फूलका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर सांसदों के इस दौरे की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सहानुभूति 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ होनी चाहिए।
फूलका बोले- पीड़ित परिवारों के प्रति हो सहानुभूति
एचएस फूलका ने कहा कि वह बीजेपी के तीनों सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाकर शोक व्यक्त करने की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सज्जन कुमार 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे और उनके घर जाकर शोक व्यक्त करना पीड़ित परिवारों की भावनाओं के खिलाफ है।
फूलका ने कहा कि बीजेपी ने लंबे समय तक 1984 के मामलों में न्याय की लड़ाई का समर्थन किया है और दोषियों को जेल में रखने की मांग में पीड़ितों का साथ दिया है। ऐसे में बीजेपी सांसदों का यह कदम उन्हें विरोधाभासी लगता है।
तीनों सांसदों के बहिष्कार की मांग
फूलका ने 1984 की हिंसा के पीड़ितों और उनके परिवारों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई परिवार आज भी उस दौर की हिंसा और अपने साथ हुई घटनाओं के दर्द से उबर नहीं पाए हैं।
उन्होंने सज्जन कुमार के घर जाने वाले तीनों बीजेपी सांसदों के बहिष्कार की मांग भी की।
1984 दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे सज्जन कुमार
पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सज्जन कुमार 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे। वह उम्रकैद की सजा काट रहे थे। 20 अगस्त को 80 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
सज्जन कुमार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान सिख समुदाय के लोगों की हत्या से जुड़े मामले में मुकदमा चला था। उनके निधन के बाद शनिवार को नई दिल्ली में उनकी प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।
1984 हिंसा के पीड़ितों के लिए लंबे समय से काम करते रहे हैं फूलका
एचएस फूलका 1984 की हिंसा से प्रभावित पीड़ितों और उनके परिवारों की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहे हैं। उन्होंने कई मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अदालतों में पैरवी की है।
इसी वजह से सज्जन कुमार के निधन के बाद बीजेपी सांसदों के उनके घर जाने के मुद्दे पर फूलका की प्रतिक्रिया को 1984 के दंगा मामलों की पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है।
तीनों सांसद दिल्ली की अलग-अलग सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं
कमलजीत सहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी और योगेंद्र चंदोलिया दिल्ली की अलग-अलग लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये सीटें पहले की आउटर दिल्ली लोकसभा सीट से अलग होकर अस्तित्व में आई हैं।
रामवीर सिंह बिधूड़ी दक्षिण दिल्ली, कमलजीत सहरावत पश्चिम दिल्ली और योगेंद्र चंदोलिया उत्तर-पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पुराने मामलों को लेकर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
बीजेपी सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाने का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में उनकी प्रार्थना सभा होने वाली है। इसके साथ ही 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों और उस दौर में कांग्रेस नेताओं की कथित भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में है।
फूलका की आपत्ति ने इस मुद्दे को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है और बीजेपी सांसदों के शोक दौरे को लेकर कांग्रेस तथा 1984 के पीड़ितों के पक्ष में आवाज उठाने वाले लोगों के बीच बहस शुरू हो गई है।







