सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की गई है कि पुनरीक्षण के दौरान जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, उनकी सूची और प्रत्येक नोटिस जारी करने का स्पष्ट कारण सार्वजनिक किया जाए। इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें उन्हें पहली बार पंजीकरण कराने वाला आवेदक घोषित न करना पड़े।
प्रशांत भूषण ने कोर्ट में उठाया मामला
बुधवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने यह मामला उठाया।
भूषण ने बताया कि मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने मुख्य याचिका पर नोटिस जारी किया था और मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को होने की संभावना थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से जल्द सुनवाई का अनुरोध किए जाने पर पीठ ने सुनवाई की तारीख 28 अक्टूबर तय कर दी। जब प्रशांत भूषण ने इससे पहले सुनवाई करने का आग्रह किया, तो पीठ ने कहा कि वह ऐसा आदेश जारी करने पर विचार कर रही है, जिससे मामले का समाधान हो सके।
चुनाव आयोग ने बढ़ाई दावे-आपत्तियों की समय-सीमा
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी निर्देश के तहत पुनरीक्षण प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा एक महीने बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दी थी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को जारी की जानी है।
इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने और सूची में संशोधन से जुड़े मामलों पर विचार किया जाना है।
SIR के मानदंड और नोटिस के कारण सार्वजनिक करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। याचिका में चुनाव आयोग से उन मानदंडों, परिभाषाओं और पैमानों का खुलासा करने की मांग की गई है, जिनके आधार पर कंप्यूटर सिस्टम और परिचालन दिशानिर्देशों के तहत मतदाताओं को ‘लॉजिकल विसंगतियों’ की श्रेणी में रखा जाता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है। उन्होंने नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सूची और नोटिस जारी करने के पीछे के विशिष्ट कारणों का भी खुलासा करने की मांग की है।
पहले से पंजीकृत मतदाताओं के लिए Form 6 पर आपत्ति
याचिकाकर्ताओं ने लंबित मामले में एक अतिरिक्त आवेदन दाखिल कर पहले से पंजीकृत मतदाताओं के लिए Form 6 से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि जिन लोगों का नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज था और जिसे पुनरीक्षण के दौरान हटा दिया गया, उनसे दोबारा नाम जोड़ने के लिए पहली बार पंजीकरण कराने संबंधी घोषणा न मांगी जाए।
इसके बजाय, ऐसे मतदाताओं के नाम बहाल करने के लिए उपयुक्त फॉर्म या घोषणा-पत्र की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है।
क्या है Form 6?
Form 6 का इस्तेमाल पात्र व्यक्ति द्वारा मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने में किया जाता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम बहाल करने के लिए अलग प्रक्रिया होनी चाहिए, क्योंकि उनकी स्थिति नए मतदाता के पंजीकरण से अलग है।
28 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब सुप्रीम कोर्ट में 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। इस मामले में अदालत से मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान जारी नोटिसों की पारदर्शिता, नाम हटाए जाने के कारणों और पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम बहाल करने की प्रक्रिया पर निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। अदालत का रुख आगे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।







