National Thoughts Logo
National Thoughts
AWebPortalOfPositiveJournalism

LTCG टैक्स पर वित्त मंत्री के बयान से बहस तेज, क्या होगा टैक्स सुधार?

a
admin
14 अक्टूबर 2026 | 04:11 pm IST
Featured Image

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की समीक्षा को लेकर दिए गए बयान के बाद शेयर बाजार में टैक्स सुधारों की उम्मीद फिर तेज हो गई है। यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं और सरकार अगले केंद्रीय बजट की तैयारी में जुटी है।

भारत में जुलाई 2024 में सूचीबद्ध इक्विटी पर LTCG टैक्स की दर 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दी गई थी। इसके साथ ही टैक्स छूट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये की गई थी। वहीं, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स की दर 15% से बढ़ाकर 20% कर दी गई थी। बजट 2026 में इक्विटी डेरिवेटिव्स पर STT भी बढ़ाया गया, जिसकी नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हुईं।

अब वित्त मंत्री के ताजा बयान ने इन करों में संभावित बदलाव को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल टैक्स दरों में बदलाव का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है।

वित्त मंत्री ने टैक्स समीक्षा पर क्या कहा?

मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार पर लगने वाले टैक्स को लेकर जारी बहस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि STT को लेकर काफी चर्चा हो रही है और हितधारकों की राय सुनना अच्छी बात है।

वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि वह इस बहस को गंभीरता से सुनेंगी। हालांकि, उन्होंने किसी भी तरह के बदलाव का वादा नहीं किया। उन्होंने बजट प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है।

उनके बयान के बाद निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकार आने वाले समय में इक्विटी टैक्स व्यवस्था की समीक्षा कर सकती है। लेकिन अभी किसी राहत या नई दर की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

टैक्स समीक्षा की चर्चा के बीच बाजार में तेजी

वित्त मंत्री के बयान के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,109 अंक यानी 1.54% चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 358.60 अंक यानी 1.60% की बढ़त रही और यह 22,721.95 पर बंद हुआ।

बाजार में तेजी के पीछे संभावित टैक्स समीक्षा की उम्मीदों के साथ आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी को भी अहम वजह बताया गया। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

टैक्स पर बहस अब क्यों तेज हुई?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी ने इस सवाल को तेज कर दिया है कि क्या भारत में इक्विटी पर लगने वाले टैक्स विदेशी निवेश के लिए बाजार को कम आकर्षक बना रहे हैं।

SBI रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में 11 तारीख तक भारतीय शेयरों से 44,166 करोड़ रुपये निकाले। इसके साथ ही 2026 में उनकी कुल इक्विटी निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह रकम 2025 के पूरे साल में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी अधिक है।

रिपोर्ट में इक्विटी पर LTCG टैक्स समाप्त करने और इसके साथ पात्र निवेश की होल्डिंग अवधि बढ़ाकर दो या तीन साल करने की सिफारिश की गई है। इसका तर्क है कि टैक्स व्यवस्था में बदलाव से पूंजी के अस्थिर प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह एक शोध रिपोर्ट की सिफारिश है, सरकार का घोषित फैसला नहीं।

क्या LTCG टैक्स में कटौती संभव है?

LTCG और STT की समीक्षा को लेकर चर्चा जरूर बढ़ी है, लेकिन टैक्स में कटौती या किसी नई व्यवस्था की संभावना अभी अनिश्चित है। सरकार को एक ओर शेयर बाजार में निवेश को प्रोत्साहित करने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने की जरूरत है, तो दूसरी ओर टैक्स से होने वाली आय और राजकोषीय संतुलन का भी ध्यान रखना होगा।

अगर सरकार LTCG या STT में बदलाव करती है, तो इसका असर निवेशकों की लागत, शेयर बाजार में कारोबार और निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी भी संभावित बदलाव का वास्तविक प्रभाव उसकी शर्तों और लागू होने की तारीख पर निर्भर करेगा।

निवेशकों की नजर अब बजट पर

वित्त मंत्री के बयान ने टैक्स सुधारों की उम्मीदों को हवा दी है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को किसी निश्चित घोषणा का इंतजार करना होगा। विदेशी निवेशकों की निकासी, बाजार की प्रतिस्पर्धात्मकता और सरकारी राजस्व के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए अहम चुनौती रहेगी।

आने वाले बजट में LTCG और STT को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर बाजार की नजर रहेगी। तब तक टैक्स में राहत को लेकर किसी भी संभावना को सरकारी निर्णय के बजाय चर्चा और अपेक्षा के रूप में ही देखना उचित होगा।

प्रकाशन से पहले जरूरी जांच: लेख में दिए गए सेंसेक्स-निफ्टी के स्तर, FPI निकासी के आंकड़े, वित्त मंत्री के बयान और बजट 2026 से जुड़े टैक्स बदलावों की तारीखों की आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि कर लें।