कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आभार जताया है। दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर राहुल गांधी को धन्यवाद दिया। यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसके बाद CJP के नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया
अभिजीत दिपके ने X पर लिखा कि आशुतोष रांका और सौरव दास की कथित गैरकानूनी गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए वह राहुल गांधी के आभारी हैं। पार्टी की वकील रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी साझा की।
उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को संसद मार्ग थाने में गिरफ्तार किया। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि नेताओं पर बिना अनुमति प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की आशंका
पार्टी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार नेताओं को सुबह अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई थी। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि उन्हें देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और तड़के करीब 3 बजे एक निजी वैन से संसद मार्ग थाने लाया गया।
पार्टी की ओर से उनकी न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि, हिरासत और कानूनी कार्रवाई से संबंधित इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
राहुल गांधी ने गिरफ्तारी को बताया ‘कायरतापूर्ण हरकत’
राहुल गांधी ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए इसे ‘कायरतापूर्ण हरकत’ बताया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना अपराध नहीं होना चाहिए और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना गलत है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन अलग-अलग मंचों से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक है—नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना।
जंतर-मंतर को लेकर राहुल गांधी का बयान
कांग्रेस नेता ने जंतर-मंतर को जनता का स्थान बताते हुए कहा कि इसे वापस हासिल करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उनके बयान को CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष की ओर से मिले समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।







