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सोशल मीडिया पर छाई E20 जनता पार्टी, नितिन गडकरी के इस्तीफे की उठी मांग

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admin
27 जुलाई 2026 को 07:43 am बजे
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सोशल मीडिया के दौर में राजनीति अब केवल चुनावी रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रह गई है। मीम्स, रील्स और व्यंग्यात्मक पोस्ट अब ऐसे डिजिटल हथियार बन चुके हैं, जो कई बार बड़े राजनीतिक आंदोलनों जितना प्रभाव पैदा कर देते हैं। शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा में रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया अभियान ‘E20 जनता पार्टी’ तेजी से वायरल हो रहा है।

इस बार अभियान के केंद्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और सरकार की E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति है।

युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने शुरू किया डिजिटल अभियान

दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान की शुरुआत किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने की है।

इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शुरू हुए इस अभियान ने कुछ ही घंटों में बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रविवार को बनाए गए E20 जनता पार्टी के एक्स अकाउंट को कुछ ही समय में 25 हजार से अधिक फॉलोअर्स मिल गए।

सोशल मीडिया पर “Gen Z Only One Demand: Gadkari Resign” और “धर्मेंद्र प्रधान गया… अबकी बार गडकरी बाहर” जैसे हैशटैग और नारे तेजी से वायरल हो रहे हैं।

मीम्स और रील्स के जरिए सरकार पर निशाना

E20 जनता पार्टी का प्रचार-प्रसार पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित है।

छोटे-छोटे पोस्ट, मीम्स, व्यंग्यात्मक स्लोगन और रील्स के जरिए सरकार की E20 नीति की आलोचना की जा रही है। जिस तरह CJP ने सोशल मीडिया के जरिए अपने अभियान को चर्चा में लाया था, उसी तर्ज पर E20 जनता पार्टी भी डिजिटल मंचों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है।

क्या हैं E20 जनता पार्टी की प्रमुख मांगें?

यह अभियान केवल नितिन गडकरी के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। अभियान चलाने वाले कुछ प्रमुख मांगें भी उठा रहे हैं।

उपभोक्ताओं को 100% पेट्रोल खरीदने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।

पेट्रोल पंपों पर ईंधन की स्पष्ट लेबलिंग की जाए।

ग्राहकों को यह जानकारी मिले कि वे किस प्रकार का ईंधन खरीद रहे हैं।

एथेनॉल मिश्रित ईंधन के फायदे और नुकसान से जुड़े सभी सरकारी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।

माइलेज, इंजन पर असर, उत्सर्जन और रखरखाव लागत से जुड़े दावों की स्वतंत्र एजेंसियों से जांच कराई जाए।

100 ऑक्टेन पेट्रोल को लेकर भी उठे सवाल

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल पहले से उपलब्ध है, लेकिन यह केवल चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर मिलता है और इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से काफी अधिक है।

उनका तर्क है कि यदि सरकार उपभोक्ताओं को विकल्प देने की बात करती है, तो उचित कीमत पर बिना एथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान

यह डिजिटल अभियान अब सोशल मीडिया से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने 4 अगस्त को संसद मार्च करने की घोषणा की है।

संगठन का आरोप है कि E20 ईंधन के कारण कई वाहनों का माइलेज कम हुआ है, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है और विशेष रूप से पुराने वाहनों के रखरखाव का खर्च बढ़ा है। उनका कहना है कि इससे परिवहन व्यवसाय की लागत बढ़ रही है।

सरकार ने दावों को किया खारिज

केंद्र सरकार ने E20 ईंधन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों से असहमति जताई है।

हाल ही में संसद में पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण वाहनों के प्रदर्शन पर व्यापक या प्रमाणित शिकायतें प्राप्त नहीं हुई हैं।

सरकार का कहना है कि E20 नीति से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, किसानों को लाभ मिलता है और प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलती है।

फिलहाल पूरी तरह डिजिटल है आंदोलन

अभी तक E20 जनता पार्टी का आंदोलन पूरी तरह सोशल मीडिया तक सीमित है। न तो बड़े धरने आयोजित किए गए हैं और न ही किसी सार्वजनिक प्रदर्शन की शुरुआत हुई है।

हालांकि, इंटरनेट पर मीम्स, पैरोडी वीडियो और वायरल पोस्ट के जरिए यह अभियान युवाओं के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

क्या सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचेगा आंदोलन?

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या E20 जनता पार्टी केवल कुछ दिनों का सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर रह जाएगी या फिर यह अभियान वास्तविक राजनीतिक दबाव बनाने में सफल होगा।

डिजिटल युग की राजनीति में अब बड़े मंचों और लंबी रैलियों के साथ-साथ एक वायरल मीम, एक रील या एक हैशटैग भी जनमत तैयार करने और राजनीतिक बहस को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि E20 जनता पार्टी का यह डिजिटल अभियान सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या फिर जमीनी आंदोलन का रूप लेता है।