National Thoughts Logo
National Thoughts
AWebPortalOfPositiveJournalism

सिर्फ विरोध-प्रदर्शन पर नहीं कर सकते लाठीचार्ज, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

a
admin
27 जुलाई 2026 को 07:20 am बजे
Featured Image

देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि सिर्फ विरोध-प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती। यदि कहीं जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान की, जिनमें विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए गए हैं। इनमें छात्रों की ओर से दायर एक याचिका भी शामिल है, जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने का दावा किया गया है।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार’

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार देता है।

उन्होंने मौखिक टिप्पणी में कहा कि जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, तब तक केवल विरोध करने के आधार पर बल प्रयोग उचित नहीं ठहराया जा सकता। यदि किसी भी मामले में पुलिस की ओर से ज्यादती हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

देशभर में पुलिस प्रोटोकॉल एक जैसा होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह केवल दिल्ली या किसी एक राज्य का मुद्दा नहीं है।

पीठ ने कहा कि पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस के प्रोटोकॉल और कार्यप्रणाली में एकरूपता होनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए।

याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में छात्रों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।

एक अन्य याचिका में बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा AK-47 राइफल के कथित इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। अदालत ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

पुलिसकर्मियों और छात्रों, दोनों की सुरक्षा जरूरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का पक्ष रखने वाले वकील को भी सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी।

इस दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत के लिए छात्र और पुलिसकर्मी, दोनों की सुरक्षा समान रूप से महत्वपूर्ण है। यदि किसी भी पक्ष को चोट पहुंचती है तो यह चिंता का विषय है।

राज्य सरकारों से भी उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की तैयारियों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यदि विरोध-प्रदर्शन हिंसक होने की आशंका रहती है, तो पुलिसकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

पीठ ने पूछा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस बल को हेलमेट, सुरक्षा कवच और अन्य आवश्यक उपकरण क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए।

निष्पक्ष जांच पर कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अनावश्यक बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि जहां भी पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं, वहां निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।