भाभी- पता है देवर जी, 50 की होते हुए भी तुम्हारे
एक दोस्त ने मेरी खूबसूरती की तारीफ की
देवर- पक्का मुश्ताक भाई होगा
भाभी- आपने कैसा पहचाना?
देवर- क्योंकि वो कबाड़ का व्यापारी है,
उसे कबाड़ की पहचान है
देवर का जवाब सुनकर भाभी की बोलती बंद हो गई……
भाभी- प्यार में पैसों की अहमियत नहीं होती
भाभी (देवर से)- तुम कुछ काम क्यों नहीं करते?
देवर- मुझे देखना था कि निकम्मा बनने के बाद,
कैसा फील होता है?


