National Thoughts Logo
National Thoughts
AWebPortalOfPositiveJournalism

छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई: इतिहास बताता है, यह किसी एक सरकार तक सीमित नहीं

a
admin
22 जुलाई 2026 को 06:49 am बजे
Featured Image

रजनीकांत तिवारी /स्वतंत्र भारत का इतिहास बताता है कि कांग्रेस, जनता दल, भाजपा और विभिन्न क्षेत्रीय दलों की सरकारों के कार्यकाल में अलग-अलग समय पर छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई हुई है। इसलिए किसी एक दल या सरकार को इसका अकेला जिम्मेदार ठहराने के बजाय यह कहना अधिक तथ्यपरक होगा कि “विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया।”

1955: पटना छात्र आंदोलन

कांग्रेस शासन के दौरान पटना में छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी हुई। इस घटना में छात्रों की मौत के बाद देशभर में बहस छिड़ गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इस घटना, छात्र अनुशासन और पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी थी।

1974: गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलन

गुजरात में कांग्रेस सरकार के खिलाफ छात्रावास शुल्क वृद्धि, महंगाई और भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू हुआ नवनिर्माण आंदोलन व्यापक जनआंदोलन में बदल गया। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोलीबारी का सहारा लिया।

इसी वर्ष बिहार में शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और विधानसभा भंग करने की मांग को लेकर छात्र संघर्ष समिति का आंदोलन शुरू हुआ। बाद में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले इस आंदोलन के दौरान भी कई स्थानों पर पुलिस कार्रवाई हुई।

1990: मंडल आयोग के विरोध में आंदोलन

जनता दल सरकार द्वारा मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय नौकरियों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन हुए। इस दौरान प्रदर्शन, गिरफ्तारियां, आत्मदाह के प्रयास और पुलिस कार्रवाई देखने को मिली।

2006: मेडिकल छात्रों का आरक्षण विरोध

कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों ने देशव्यापी आंदोलन किया। दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में पुलिस ने लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का प्रयोग किया।

2012: निर्भया आंदोलन

दिल्ली में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद हजारों छात्र और युवा महिला सुरक्षा, कठोर कानून और त्वरित न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। इंडिया गेट और रायसीना हिल के आसपास दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

2017: बीएचयू छात्राओं का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की छात्राओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों और विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित उदासीनता के खिलाफ आंदोलन किया। पुलिस कार्रवाई में कई छात्राएं घायल हुईं।

2019: जामिया मिल्लिया इस्लामिया आंदोलन

केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों का आंदोलन हुआ। इस दौरान दिल्ली पुलिस परिसर में दाखिल हुई और लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

2024: आरजी कर मेडिकल कॉलेज आंदोलन

पश्चिम बंगाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की एक डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर निकाले गए ‘नबन्ना मार्च पर पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का प्रयोग किया।

2025: पंजाब विश्वविद्यालय आंदोलन

पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट-सिंडिकेट व्यवस्था और लंबे समय से लंबित सीनेट चुनाव की मांग को लेकर चंडीगढ़ में प्रदर्शन हुआ। बैरिकेड तोड़े जाने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया।

2026: शिक्षक भर्ती और NEET विवाद

2026 में बिहार में शिक्षक भर्ती के चौथे चरण की अधिसूचना जारी करने में देरी के विरोध में अभ्यर्थियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया।

इसी वर्ष जुलाई में दिल्ली में परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

लोकतंत्र की असली कसौटी

इतिहास यह संकेत देता है कि छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित नहीं रही है। अलग-अलग समय और परिस्थितियों में विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं हुई हैं।

लोकतंत्र की वास्तविक कसौटी केवल विरोध प्रदर्शनों का होना नहीं, बल्कि यह है कि सरकारें युवाओं की असहमति को किस प्रकार देखती हैं—क्या उसे केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न मानती हैं, या संवाद, जवाबदेही और संस्थागत सुधार का अवसर भी समझती हैं। यही दृष्टिकोण लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक मजबूत और उत्तरदायी बना सकता है।

#StudentProtest #छात्रआंदोलन #लोकतंत्र #PoliceAction #EducationReform #StudentsRights