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J&K में छुट्टियों पर घमासान, विधानसभा में फिर गूंजा शेख अब्दुल्ला vs महाराजा हरि सिंह

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admin
22 सितंबर 2026 | 02:30 pm IST
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकारी छुट्टियों को लेकर मंगलवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आमने-सामने आ गए। विवाद शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती और महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश को लेकर हुआ। इस दौरान सदन में करीब 15 मिनट तक हंगामा हुआ और बाद में BJP विधायकों ने वॉकआउट कर दिया।

शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी की मांग

हंगामे की शुरुआत नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक अब्दुल मजीद लार्मी की मांग से हुई। उन्होंने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर सरकारी अवकाश बहाल करने की मांग उठाई। लार्मी ने कहा कि अगर शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी नहीं दी जाती, तो महाराजा हरि सिंह की जयंती पर दी जा रही छुट्टी पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।

इस पर BJP विधायकों ने आपत्ति जताई और सदन में विरोध शुरू हो गया। PDP विधायक वहीद पारा ने भी शेख अब्दुल्ला की जयंती के साथ 13 जुलाई के शहीद दिवस से जुड़ी छुट्टी बहाल करने की मांग उठाई।

स्पीकर ने साफ किया- छुट्टी देने का अधिकार नहीं

विवाद बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो विधानसभा अध्यक्ष और न ही सदन के पास सरकारी छुट्टी घोषित करने या उसे रद्द करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि विधायक ने सदन के सामने केवल अपनी मांग और विचार रखे हैं।

2019 के बाद बदला था छुट्टियों का कैलेंडर

इस विवाद की पृष्ठभूमि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर के सरकारी अवकाश कैलेंडर में हुए बदलावों से जुड़ी है। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद प्रशासन ने कई ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व वाली छुट्टियों को कैलेंडर से हटा दिया था।

इनमें शेख अब्दुल्ला की जयंती और 13 जुलाई का शहीद दिवस भी शामिल थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन बदलावों का विरोध किया था।

13 जुलाई के शहीद दिवस का इतिहास

13 जुलाई 1931 को श्रीनगर की केंद्रीय जेल के बाहर हुई गोलीबारी में 22 कश्मीरी मुसलमानों की मौत हुई थी। यह घटना अब्दुल कादिर के खिलाफ चल रहे मुकदमे के दौरान हुई थी। बाद में 13 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

हालांकि, 2019 के बाद इसे आधिकारिक सरकारी अवकाश के तौर पर कैलेंडर से हटा दिया गया।

महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी छुट्टी

दूसरी ओर, महाराजा हरि सिंह की जयंती 23 सितंबर को सरकारी अवकाश के रूप में शामिल किया गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार के 2026 के आधिकारिक अवकाश आदेश में 23 सितंबर को “Birthday of Maharaja Hari Singh Ji” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। 26 अक्टूबर को Accession Day भी सरकारी अवकाश है।

महाराजा हरि सिंह की जयंती को सरकारी अवकाश घोषित करने का फैसला 2022 के सरकारी आदेश के बाद लागू हुआ था।

उमर सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती

छुट्टियों को लेकर यह विवाद उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है। 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक इतिहास से जुड़ी कुछ छुट्टियों को बहाल करने का वादा किया था।

अब विधानसभा में शेख अब्दुल्ला की जयंती और 13 जुलाई से जुड़ी छुट्टियों की मांग फिर उठने से सरकार पर अपने पुराने रुख को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

BJP विधायकों का वॉकआउट

हंगामे के बाद BJP के अधिकांश विधायक सदन से बाहर चले गए। हालांकि BJP विधायक युधवीर सेठी सदन में मौजूद रहे क्योंकि उन्हें प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपने सवाल का जवाब लेना था।

उमर अब्दुल्ला ने सेठी के सदन में रुकने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता के मुद्दे उठाने के लिए सदन में मौजूद रहना महत्वपूर्ण है।

छुट्टियों से आगे इतिहास और राजनीतिक विरासत का सवाल

जम्मू-कश्मीर में सरकारी छुट्टियों का विवाद केवल तारीखों तक सीमित नहीं है। शेख अब्दुल्ला और महाराजा हरि सिंह से जुड़ी छुट्टियों को लेकर बहस क्षेत्र के इतिहास, राजनीतिक विरासत और 2019 के बाद बदले प्रशासनिक एवं राजनीतिक विमर्श से भी जुड़ी हुई है।

मौजूदा विधानसभा में हुई बहस ने एक बार फिर दिखाया कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास से जुड़ी इन तारीखों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण अब भी अलग हैं।