हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से जारी बिजली संकट के बीच राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई और निजी कंपनियों को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले की समीक्षा का आश्वासन दिए जाने के बाद राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि राज्य के बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की एंट्री नहीं होने दी जाएगी और समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए अगली बैठक 3 नवंबर को निर्धारित की गई है।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने पर हुआ विवाद
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को दो जिलों में बिजली आपूर्ति करने का लाइसेंस दिया था। इन क्षेत्रों में पहले से ही सरकारी बिजली वितरण कंपनियां काम कर रही थीं। इस फैसले के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने विरोध शुरू कर दिया।
‘हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ ने इसके विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था। कर्मचारियों का कहना था कि निजी कंपनियों को बिजली वितरण की अनुमति देने से सरकारी बिजली व्यवस्था और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
अनिल विज बोले- धारा 108 के तहत कार्रवाई करेंगे
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का सरकार ने शुरू से विरोध किया है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर कर्मचारी यूनियन के नेताओं से बातचीत की गई है।
विज के अनुसार, सरकार के पास बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत नियामक आयोग को निर्देश देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संबंधित आदेश की समीक्षा और उसे रद्द करने की दिशा में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने और बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सभी विकल्पों पर विचार करने को तैयार है।
मुख्यमंत्री सैनी ने दिया कर्मचारियों को भरोसा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि HERC के आदेश के बाद ही राज्य सरकार ने अपना विरोध स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारी यूनियन के साथ खड़ी है।
सैनी के मुताबिक, कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत HERC को मामले की समीक्षा करने के लिए अधिकृत किया गया है। बातचीत के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।
40 हजार कर्मचारियों की हड़ताल से प्रभावित हुई बिजली आपूर्ति
हड़ताल के दौरान राज्य के करीब 40 हजार बिजली कर्मचारियों के काम से दूर रहने के कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। गुरुग्राम सहित कई शहरों में बिजली संकट का असर पानी की आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादन और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी पड़ा।
हड़ताल के कारण रिहायशी इलाकों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर बिजली की लंबी कटौती के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ।
गुरुग्राम में 30 घंटे से अधिक बिजली कटौती की शिकायत
गुरुग्राम के कई इलाकों में 30 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं आने की शिकायतें सामने आईं। अशोक विहार फेज-3, दौलताबाद फ्लाईओवर, खांडसा रोड, राजेंद्र पार्क और फर्रुखनगर जैसे क्षेत्रों में देर रात लोग सड़कों पर उतर आए।
गुस्साए लोगों ने मुख्य सड़कों पर जाम लगाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जाम खुलवाने का प्रयास किया। इस दौरान सड़कों पर लंबा जाम लगने से कामकाजी लोगों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी परेशानी हुई।
3 नवंबर की बैठक पर टिकी नजरें
हड़ताल वापस होने के बाद अब बिजली आपूर्ति सामान्य करने और कर्मचारियों की लंबित मांगों पर समाधान निकालने की चुनौती है। निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस की समीक्षा और उसे रद्द करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच 3 नवंबर को होने वाली अगली बैठक में लंबित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक के नतीजों से हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था और निजी कंपनियों की भूमिका को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।







