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वैश्विक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, घरेलू मांग को RBI का श्रेय

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admin
24 अक्टूबर 2026 | 10:24 am IST
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पश्चिम एशिया संकट, बढ़ती महंगाई और वैश्विक व्यापार तनाव जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की मजबूती और लक्षित नीतिगत उपाय आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शुक्रवार को जारी अक्टूबर बुलेटिन में यह बात कही गई है।

बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक वाले लेख के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां वृद्धि को समर्थन दे रही हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां

आरबीआई के लेख के अनुसार, वैश्विक तनाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ाया है। इसके चलते प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों पर दबाव पड़ा है। वहीं, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड पर ऊंची ब्याज दरों ने राजकोषीय और वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से 2026 और 2027 के लिए वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के अनुमान में सुधार के बावजूद दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने कई जोखिम बने हुए हैं। इनमें बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक कर्ज का ऊंचा स्तर और सरकारी वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं।

हालांकि, कृत्रिम मेधा (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत देने वाले कारक हैं।

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से भारत को समर्थन

आरबीआई के लेख में कहा गया है कि भारत ऊर्जा का शुद्ध आयातक होने के बावजूद घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती के कारण आर्थिक विकास को बनाए रखने में सक्षम रहा है। उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत देते हैं।

हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा की कीमतों और आयात लागत में बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। ऐसे में घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों की निरंतरता भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

खुदरा महंगाई बढ़ने से मौद्रिक नीति पर नजर

बुलेटिन के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई में हाल के महीनों में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही महंगाई का दबाव अधिक क्षेत्रों तक फैलने के संकेत भी मिले हैं।

लेख में कहा गया है कि महंगाई की स्थिति को देखते हुए मौद्रिक नीति के रुख में आवश्यकतानुसार बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। इसका उद्देश्य महंगाई के दबाव और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना है।

RBI के कदमों से विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा

आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कई नियामकीय उपाय किए हैं। बुलेटिन के अनुसार, इन कदमों से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।

विदेशी मुद्रा में FCNR (B) अदला-बदली सुविधा के तहत मजबूत प्रवाह ने भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को समर्थन दिया। इसके अलावा, अगस्त 2026 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेश से भेजे गए धन के प्रवाह में मजबूती दर्ज की गई।

अगस्त में FDI प्रवाह मजबूत

बुलेटिन के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना रहा। संचार, विविध सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में कुल FDI का दो-तिहाई से अधिक निवेश आया।

देश में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में अमेरिका, सिंगापुर और मॉरीशस की हिस्सेदारी करीब 72 प्रतिशत रही। यह निवेश प्रवाह भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों की भागीदारी को दर्शाता है।

शेयर बाजार में गिरावट, घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

आरबीआई के बुलेटिन के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में 19 तारीख तक भारतीय शेयर बाजारों में ज्यादातर गिरावट का रुख रहा। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई।

इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार बने रहे, जिससे बाजार में घरेलू निवेश का समर्थन बना रहा।

RBI ने लेख के विचारों पर दी स्पष्टता

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि अक्टूबर बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं। इन्हें केंद्रीय बैंक का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, लेख में वैश्विक जोखिमों के बावजूद भारत की घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र और निवेश प्रवाह को अर्थव्यवस्था के लिए सहायक कारकों के रूप में रेखांकित किया गया है। वहीं, महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण बताया गया है।