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महंगे कच्चे तेल से बढ़ा जापान का ट्रेड डेफिसिट, 2.81 लाख करोड़ येन पर पहुंचा

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admin
21 अक्टूबर 2026 | 11:54 am IST
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जापान का व्यापार घाटा चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बढ़कर 2.81 लाख करोड़ येन (17.8 अरब अमेरिकी डॉलर) पर पहुंच गया है। ईरान में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और आयात लागत बढ़ने से जापान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई।

निर्यात और आयात दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि

वित्त मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान जापान का निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 18.4 प्रतिशत बढ़कर 63.5 लाख करोड़ येन हो गया। वहीं, आयात में 20.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 66.3 लाख करोड़ येन पर पहुंच गया।

निर्यात और आयात, दोनों का यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, आयात में निर्यात की तुलना में अधिक तेजी आने से देश का व्यापार घाटा बढ़ गया। महंगे तेल का असर प्लास्टिक उत्पादों, परिवहन और माल ढुलाई सहित कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित

प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण जापान अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य उसके लिए महत्वपूर्ण मार्ग रहा है।

युद्ध के कारण इस मार्ग से आवाजाही प्रभावित होने और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से जापान को तेल आयात के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे उद्योगों की उत्पादन लागत और परिवहन खर्च बढ़ने का दबाव है।

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत फरवरी में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो हाल में बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल हो गई। पिछले कुछ महीनों में इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई थी।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो जापान की आयात लागत और व्यापार संतुलन पर दबाव जारी रह सकता है।

सितंबर में लगातार पांचवें महीने व्यापार घाटा

सितंबर 2026 में जापान का व्यापार घाटा 53,660 करोड़ येन रहा। यह लगातार पांचवां महीना था, जब देश को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा। हालांकि, अगस्त में दर्ज 1.1 लाख करोड़ येन के घाटे की तुलना में सितंबर में स्थिति में सुधार हुआ।

सितंबर में जापान का आयात सालाना आधार पर 18.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निर्यात में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद मासिक व्यापार घाटे में कमी आई।

कमजोर येन से बढ़ी चिंता

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा येन का कमजोर होना भी देश के लिए चिंता का विषय है। येन के कमजोर होने से विदेशों से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है। हाल में येन डॉलर के मुकाबले 150 के स्तर के आसपास बना हुआ है।

बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर पर नजर

बैंक ऑफ जापान ने पिछले महीने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया था। यह करीब 31 वर्षों का उच्च स्तर बताया गया है। बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक अगले सप्ताह प्रस्तावित है।

महंगे तेल, कमजोर येन और बढ़ती आयात लागत के बीच बैंक ऑफ जापान के अगले फैसले पर बाजार की नजर रहेगी। ब्याज दरों में बदलाव का असर देश की आर्थिक गतिविधियों, महंगाई और उपभोक्ता खर्च पर पड़ सकता है।