नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रही। सुबह के समय राजधानी के आसमान पर घनी धुंध छाई रही। सुबह 7:05 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 368 दर्ज किया गया।
इससे पहले बुधवार को 24 घंटे का औसत AQI 377 रहा था, जबकि मंगलवार को यह 350 और सोमवार को 324 दर्ज किया गया था। वहीं, पिछले शुक्रवार को दिल्ली का AQI 60 रहा था, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है। यह पिछले चार वर्षों में अक्टूबर का सबसे साफ दिन रहा था।
59 में से 18 निगरानी केंद्रों पर AQI गंभीर श्रेणी में
दिल्ली के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 18 पर AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। वहीं, 36 केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ और पांच केंद्रों पर ‘खराब’ श्रेणी में रही।
जहांगीरपुरी में सबसे अधिक 459 AQI दर्ज किया गया। इसके बाद IIT दिल्ली में 447 और पंजाबी बाग में 446 का स्तर रहा।
इसके अलावा ओखला फेज-2 में 399, बुराड़ी क्रॉसिंग और ITO में 397-397, द्वारका सेक्टर-8 में 396, मंदिर मार्ग में 393 और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 391 AQI दर्ज किया गया। इन इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के बेहद करीब पहुंच गया।
CPCB के अनुसार AQI की छह श्रेणियां
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में वर्गीकृत करता है।
0-50: अच्छा
51-100: संतोषजनक
101-200: मध्यम
201-300: खराब
301-400: बहुत खराब
401-500: गंभीर
CPCB के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 53 पर PM2.5 मुख्य प्रदूषक रहा, जबकि बाकी छह केंद्रों पर PM10 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया। एक दिन पहले इसी समय 54 केंद्रों पर PM2.5 और पांच केंद्रों पर PM10 मुख्य प्रदूषक था।
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की 2,251 घटनाएं
दिल्ली में प्रदूषण के बीच पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। NASA के उपग्रह आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच दोनों राज्यों में पराली जलाने की कुल 2,251 घटनाएं दर्ज की गईं।
इनमें पंजाब में 2,025 और हरियाणा में 226 घटनाएं शामिल हैं। अकेले 4 नवंबर को पराली जलाने की 246 घटनाएं दर्ज की गईं।
पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान उपग्रह ने पराली जलाने की 2,579 घटनाएं दर्ज की थीं। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना सावधानी से करने की जरूरत है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं का समय धीरे-धीरे दोपहर के बाद की ओर खिसक गया है।
पराली जलाने के समय में बदलाव से आंकड़ों पर असर
वर्ष 2025 में मेटियोसैट (Meteosat) द्वारा दर्ज की गई आग की घटनाओं में लगभग 98 प्रतिशत दोपहर 3 बजे के बाद हुई थीं। वहीं, 2024 में यह आंकड़ा 94 प्रतिशत था।
विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों वर्षों के आंकड़ों में अंतर का एक कारण पराली जलाने के समय में आया बदलाव भी हो सकता है।
इन उपग्रह आंकड़ों में वास्तविक घटनाओं की तुलना में कम संख्या दर्ज होने की संभावना है, क्योंकि पराली जलाने की अधिकतर घटनाएं दोपहर करीब 1:45 बजे उपग्रह के संबंधित क्षेत्र से गुजर जाने के बाद होती हैं।
इसलिए केवल उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पराली जलाने की वास्तविक स्थिति का आकलन करना पूरी तरह उचित नहीं होगा।






