नई दिल्ली। सुबह करीब 8:40 बजे नेपाल में जिंदगी रोज की तरह सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। कहीं घरों में नाश्ता तैयार हो रहा था, कहीं बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे और कहीं लोग दफ्तर व काम के लिए निकलने की तैयारी में थे। लेकिन कुछ ही देर में हालात ने ऐसा भयावह मोड़ लिया कि पूरा इलाका तबाही के मंजर में बदल गया।
ग्लेशियर टूटने से मलबे और पानी का तेज बहाव
भूकंपीय हलचलों और प्राकृतिक गतिविधियों के बीच ग्लेशियर टूटने के बाद मिट्टी, पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। देखते ही देखते इस तेज बहाव ने कई बस्तियों और आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया।
सिर्फ 30 मिनट की चेतावनी, बचाव के लिए बेहद कम समय
बताया जा रहा है कि शुरुआती चेतावनी और आपदा के प्रभाव के बीच करीब 30 मिनट का ही समय मिला। इतने कम समय में बड़ी संख्या में लोगों के लिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। यही वजह रही कि कई लोग अचानक आई तबाही से बचने के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर सके।
आपदा की भयावहता पर बोले यज्ञ प्रसाद न्यौपाने
नेपाल के वरिष्ठ सामाजिक-राजनीतिक राजनयिक और नेपाल फार्मेसी काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष यज्ञ प्रसाद न्यौपाने ने इस घटना को बेहद भयावह बताया है। उनके अनुसार, आपदा का स्वरूप और इसके विनाश का दायरा अत्यंत व्यापक है। इस घटना ने एक बार फिर नेपाल जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील देश में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए त्वरित चेतावनी और प्रभावी राहत व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है।







