नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है। कीचड़, मलबे और लगातार बदलते मौसम के बीच बचावकर्मी उन लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
मौसम की चुनौती के बीच फिर शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
शनिवार को कुछ समय के लिए रोका गया सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया। बारिश और घने कोहरे के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आईं, लेकिन मौसम में थोड़ी राहत मिलते ही हेलीकॉप्टरों ने फिर उड़ान भरनी शुरू कर दी। जमीन पर बचाव दल मलबे और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटे रहे।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा और नुवाकोट शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों में स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगह सड़कें और रास्ते बह चुके हैं, जबकि भारी मलबे के कारण राहत दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
ग्लेशियर टूटने के बाद आया तबाही का सैलाब
बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ी नदी तंत्र में अचानक पानी का तेज सैलाब उमड़ पड़ा। यह सामान्य बाढ़ से कहीं ज्यादा भयावह था। पानी के साथ चट्टानें, बर्फ, मिट्टी और भारी मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि रास्ते में आने वाली इमारतें, पुल और बिजलीघर तक इसकी चपेट में आ गए।
कुछ ही समय में कई इलाकों का भूगोल बदल गया। जहां पहले सड़कें और पुल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते थे, वहां अब मलबे का ढेर नजर आ रहा है। बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने वाले रास्ते भी बाढ़ में बह चुके हैं।
तिब्बत में भी भारी तबाही, 16 की मौत
इस आपदा का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहा। नेपाल-चीन सीमा से लगे तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी भारी तबाही हुई। यहां सीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण क्रॉसिंग कॉम्प्लेक्स को पानी और मलबे के तेज बहाव ने पूरी तरह तबाह कर दिया।
चीन के मुताबिक, तिब्बत में इस आपदा के कारण 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 546 लोग अब भी लापता हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में बाढ़ का विशाल सैलाब इमिग्रेशन बिल्डिंग के पूरे परिसर को अपनी चपेट में लेता दिखाई दिया। इन तस्वीरों ने आपदा की भयावहता को दुनिया के सामने ला दिया।
नेपाल की मदद के लिए भारत ने तेज किया राहत अभियान
नेपाल की मुश्किल घड़ी में भारत ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, भारत ने नेपाल के लिए चौथी राहत उड़ान भेजी, जिसमें करीब 11 टन राहत सामग्री भेजी गई।
भारतीय वायुसेना के C-130 विमान से भेजी गई इस खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण, टनल तकनीकी टीम के लिए जरूरी सामान, फोरेंसिक विशेषज्ञों से जुड़ी सामग्री और DNA विश्लेषण के उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी आवश्यक वस्तुएं भी भेजी गई हैं।
संपर्क टूटे इलाकों को जोड़ने के लिए बनेंगे अस्थायी पुल
जयशंकर के अनुसार, 230 फुट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के लिए जरूरी उपकरणों से लदे 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज के लिए जरूरी सामान भी भेजने की तैयारी है।
इन पुलों को स्थापित करने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी। अस्थायी पुलों के तैयार होने के बाद उन इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना आसान होने की उम्मीद है, जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
भारत ने अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी
भारत की ओर से नेपाल के लिए अब तक 68.5 टन राहत सामग्री एयरलिफ्ट की जा चुकी है। इसमें जरूरी दवाइयां, पोर्टेबल जनरेटर, खाने के पैकेट, पानी साफ करने वाली गोलियां और तकनीकी उपकरण शामिल हैं।
नेपाल को इस समय सिर्फ भोजन और दवाइयों की ही जरूरत नहीं है। सड़क और पुलों के टूट जाने के कारण प्रभावित इलाकों में भारी मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञों और अत्याधुनिक खोज-बचाव उपकरणों की भी आवश्यकता है। राहत एजेंसियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है।







