योगी सरकार राजस्व मामलों के तय समय-सीमा में निपटारे और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने पर लगातार जोर दे रही है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने तीन नए डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए हैं। इनमें राजस्व मामलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल, निचली अदालतों के रिकॉर्ड की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए ‘निचली अदालत के रिकॉर्ड का ऑनलाइन ट्रांसमिशन’ पोर्टल और धारा-34 के तहत म्यूटेशन मामलों में तेजी व पारदर्शिता के लिए ‘धारा-34 म्यूटेशन पोर्टल’ का बीटा वर्जन शामिल है।
योगी सरकार का पारदर्शिता पर फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व अदालतों में लंबित मामलों का तय समय-सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। नए पोर्टल इसी प्रक्रिया को तेज और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
ई-फाइलिंग और निचली अदालतों के रिकॉर्ड ऑनलाइन भेजने वाले पोर्टल की शुरुआत पहले बोर्ड स्तर से होगी। इसके बाद इन्हें मंडल और जिला स्तर तक लागू किया जाएगा। दोनों पोर्टल को RCCMS से जोड़ा जाएगा।
राजस्व मामलों के पंजीकरण के लिए फिलहाल ऑनलाइन और मैनुअल, दोनों व्यवस्थाएं जारी रहेंगी, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
शिकायतों की जांच पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी शिकायत का निपटारा करने से पहले उससे जुड़े तथ्यों और रिकॉर्ड की पूरी जांच की जाए। जरूरत पड़ने पर संबंधित स्तर से रिपोर्ट भी मंगाई जाए।
समीक्षा के दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मूल शिकायत से अलग जानकारी के आधार पर कार्रवाई की गई या जरूरी रिपोर्ट लिए बिना ही मामलों को बंद कर दिया गया। ऐसे असंतोषजनक मामलों की दोबारा समीक्षा कर तथ्य आधारित रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
ई-फाइलिंग से आसान होगी केस की निगरानी
ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए राजस्व मामलों को ऑनलाइन रजिस्टर किया जा सकेगा। इससे कागजी काम कम होगा, मामलों का पंजीकरण तेज होगा और आवेदक अपने केस की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे।
निचली अदालत के रिकॉर्ड होंगे ऑनलाइन
निचली अदालतों से जुड़े राजस्व मामलों के रिकॉर्ड अब ऑनलाइन भेजे और ट्रैक किए जा सकेंगे। इससे रिकॉर्ड ट्रांसफर में लगने वाला समय कम होगा और फाइलों के खोने या अनावश्यक देरी की संभावना भी घटेगी।
धारा-34 म्यूटेशन में आएगी तेजी
सेक्शन-34 म्यूटेशन पोर्टल के जरिए म्यूटेशन से जुड़े मामलों की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। इससे मामलों को तय समय में निपटाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी। लोगों को भी म्यूटेशन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
EWS सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन
राजस्व परिषद की ओर से शुरू की गई डिजिटल सेवाओं से EWS सर्टिफिकेट हासिल करना भी आसान होगा। पात्र लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन डिजिटल रूप से सत्यापन और निपटारे के लिए लेखपाल और तहसीलदार के पास भेजे जाएंगे।
आवेदक ऑनलाइन यह भी देख सकेंगे कि उनका आवेदन किस स्तर पर लंबित है। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
जमीन के बंटवारे के लिए भी ऑनलाइन सुविधा
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत संयुक्त रूप से मालिकाना हक वाली जमीन के बंटवारे के लिए भी अलग पोर्टल शुरू किया गया है। अब सह-मालिक जमीन के विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
लेखपालों की ओर से तैयार किए जाने वाले नोटिस, सार्वजनिक घोषणाएं और रिपोर्ट भी डिजिटल तरीके से प्रोसेस और मॉनिटर की जा सकेंगी।
आसान खतौनी से जमीन का रिकॉर्ड समझना होगा सरल
राजस्व परिषद ने ‘आसान खतौनी’ का वर्जन भी पेश किया है। इसका उद्देश्य आम जमीन मालिकों के लिए खतौनी में दर्ज जानकारी को समझना आसान बनाना है।
अब जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक दिखाया जाएगा, जिससे खासकर छोटे भूखंडों के मामले में अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी।
इसके अलावा रिकॉर्ड रूम में मौजूद पुराने आदेशों और पूर्व में दर्ज बंधक से जुड़े आदेशों की जानकारी को भी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जमीन के मालिकाना हक के इतिहास को समझने में लोगों और राजस्व अधिकारियों को मदद मिलेगी।
GIS तकनीक से जमीन की स्थिति की मिलेगी जानकारी
जमीन के बंटवारे से जुड़े डिजिटल सिस्टम में Geographic Information System (GIS) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जमीन की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को समझना आसान होगा।
खतौनी रिकॉर्ड, अन्य जरूरी दस्तावेज और जमीन के नक्शे को एक ही डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इससे राजस्व अदालतों और फील्ड स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
लोगों को क्या फायदा होगा?
नए डिजिटल सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आवेदन से लेकर अंतिम निपटारे तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी, सरकारी दफ्तरों के चक्कर घटेंगे और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम राजस्व सेवाओं को तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।







