अमृतसर/चित्तौड़गढ़, 10 सितंबर। सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 115वीं बटालियन, भिखीविंड में मेजर सूबेदार मनजीत सिंह के संयोजन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभक्ति, वीर रस, हास्य-व्यंग्य और गीतों के जरिए जवानों के शौर्य एवं बलिदान को नमन किया गया।
BSF अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आयोजन
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि भारतीय सीमा सुरक्षा बल के उप महानिरीक्षक अंकित गोयल रहे। 115वीं बटालियन के सीईओ अशोक सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथि पूर्व सूबेदार राम सिंह सहित अन्य बटालियनों के अधिकारी अपने परिवारों के साथ मौजूद रहे।

सरस्वती वंदना से हुआ कवि सम्मेलन का आगाज
भिवानी की डॉ. नेहा बागड़ी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कवि सम्मेलन की शुरुआत की। इसके बाद नोएडा की कवयित्री अंजना जैन ने अपने चुटीले अंदाज से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने सैनिकों के सम्मान में ‘भारत के सैनिक बब्बर शेर’ कविता प्रस्तुत कर जमकर तालियां बटोरीं।
मेरठ की डॉ. यासमीन मूमल ने “कभी मत सोचना ये कांच का गुलदान है भारत, गलतफहमी में मत रहना मियां, चट्टान है भारत” गीत के माध्यम से देशभक्ति का जज्बा जगाया।
वीर रस की कविताओं ने बढ़ाया जवानों का जोश
कवि सुनील शर्मा ने हरियाणवी अंदाज में सैनिकों को खूब हंसाया और अपनी ओजपूर्ण रचना से माहौल में जोश भर दिया—
“भरकर शोणित कलम से अंगार लिखता हूं,
मां भारती के वीरों का श्रृंगार लिखता हूं।”
दिल्ली के कवि भूपेंद्र राघव ने वीर रस की कविता के माध्यम से देशभक्ति का रंग जमाया। उनकी पंक्तियां—
“हम वीर प्रसवा संताने, छिप-छिप कर वार नहीं करते।”
ने श्रोताओं में उत्साह भर दिया।
देश की सीमाओं पर तैनात प्रहरियों को नमन
भिवानी की कवयित्री डॉ. नेहा बागड़ी ने “न तूफानों से डरते, न मौत से घबराते, सीमा पर तैनात प्रहरी भारत मां की आन बचाते” गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
रोहतक के गीतकार डॉ. अश्विनी कश्यप ‘आशू’ ने अपने गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सैनिकों के त्याग और राष्ट्रभक्ति को समर्पित पंक्तियां प्रस्तुत कीं—
“जो भी गम मिले हंसकर सहता चला गया,
गोलियों से मां भारती की आरती करता चला गया।”
डॉ. दिनेश व्यास ने बांधा देशभक्ति का समां
भीमगढ़, चित्तौड़गढ़ के राष्ट्रवादी कवि डॉ. दिनेश व्यास ने छंद, मुक्तक और हास्य-व्यंग्य के जरिए श्रोताओं को कभी हंसाया तो कभी भावुक कर दिया। अपने अनूठे संचालन से उन्होंने पूरे कार्यक्रम में ऊर्जा बनाए रखी।
उनकी ओजस्वी कविता—
“चेतक की टापों से अरि थर्राए चमकती रक्तिम हल्दीघाटी में,
बलिदानी चंदन की खुशबू आती वीर प्रसूता मेवाड़ी माटी में।”
ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया। कविता के माध्यम से उन्होंने सैनिकों और शहीदों को नमन करते हुए राष्ट्र जागरण एवं राष्ट्र वंदन का संदेश दिया।
कलम के सिपाहियों ने किया जवानों का अभिनंदन
कवि सम्मेलन में ‘कलम के सिपाहियों’ ने मंच से मुख्य अतिथि, अध्यक्ष और 115वीं बटालियन के माध्यम से देश के हर जवान का भव्य अभिनंदन एवं वंदन किया।
डॉ. दिनेश व्यास के राष्ट्रवादी काव्य पाठ और प्रभावी संचालन से प्रभावित होकर मुख्य अतिथि अंकित गोयल और कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक सिंह ने उनका विशेष अभिनंदन किया। बटालियन की ओर से एसीओ धर्मेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह और 115वीं वाहिनी परिवार ने कवियों का सम्मान किया।
कार्यक्रम के समापन पर सीईओ अशोक सिंह ने सभी कवियों, अधिकारियों और उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।







