आज यानी 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना गया है। इसी दिन 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का भी समापन होता है और श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने, व्रत रखने तथा अनंत सूत्र धारण करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता का आगमन होता है। आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी की तिथि, पूजन विधि, अनंत सूत्र का महत्व और धार्मिक मान्यताएं।
अनंत चतुर्दशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 की रात 11:18 बजे शुरू हुई और 25 सितंबर 2026 की रात 11:06 बजे समाप्त होगी।
उदयातिथि के आधार पर 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजन किया जा रहा है।
अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें लक्ष्मी-नारायण का पूजन
अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें। फिर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
इसके बाद कलश की स्थापना करें और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी को फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
14 गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व
अनंत चतुर्दशी की पूजा में 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व माना गया है। अनंत सूत्र बनाने के लिए सूती, कुशा या रेशमी धागा लिया जाता है। उस पर हल्दी और कुमकुम लगाकर 14 गांठें बांधी जाती हैं।
धार्मिक मान्यताओं में इन 14 गांठों को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़ा गया है। पूजा के दौरान इस अनंत सूत्र को भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणों में अर्पित किया जाता है।
इसके बाद धूप-दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और अनंत चतुर्दशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
पूजा के दौरान करें इस मंत्र का जाप
अनंत चतुर्दशी की पूजा के समय श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप किया जाता है—
“अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते॥”
मंत्र जाप के बाद अनंत सूत्र धारण किया जाता है। परंपरा के अनुसार महिलाएं इसे बाएं हाथ में और पुरुष दाहिने हाथ में बांधते हैं।
दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
पूजा संपन्न होने के बाद जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन कराने और यथाशक्ति दान करने की परंपरा है। अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत श्रद्धा और विधि-विधान से करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
क्यों खास है अनंत चतुर्दशी?
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का विशेष पर्व है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है। यही कारण है कि यह तिथि वैष्णव और गणेश भक्तों दोनों के लिए विशेष महत्व रखती है। भक्त भगवान से जीवन के संकटों को दूर करने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।







