भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत श्रीगणेश की पूजा से की जाती है। यदि आप प्रतिदिन गणेश जी की आराधना के समय “मंगल दाता बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार” भजन का श्रद्धापूर्वक गायन या श्रवण करते हैं, तो मान्यता है कि जीवन के विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि, सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
।। गणेश जी का भजन ।।
मंगल दाता बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार
मंगल दाता बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार,
आ जाओ मोरे गनराजा, मूसा पे होके सवार।
हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो,
आना हो अंगना हमार।।
प्रथम पूज्य गणपति की महिमा
सब देवता में देवा पहले पूजे जाते,
भक्तों की टेर सुनते, देर ना लगाते।
मूसा सवार होके दर्शन दो इक बार,
हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो,
आना हो अंगना हमार।।
विद्या और बुद्धि के दाता गणेश
विद्या बुद्धि के तुम हो दाता,
चरणों से जोड़ा स्वामी मैंने है नाता।
हाथ दया कर रख देना,
मेरे सिर पर तुम एक बार।
हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो,
आना हो अंगना हमार।।
भक्तों की पुकार
तेरे दर के देवा हम हैं भिखारी,
हम सब आए हैं शरण तिहारी।
दृष्टि दया की कर देना,
हम भक्तों पर एक बार।
राहुल पाल भजन तेरे गाए,
कर दो बेड़ा पार।
हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो,
आना हो अंगना हमार।।
भजन का समापन
मंगल दाता बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार,
आ जाओ मोरे गनराजा, मूसा पे होके सवार।
हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो,
आना हो अंगना हमार।।
भजन का महत्व
यह भजन भगवान श्रीगणेश की कृपा प्राप्त करने का एक सरल और मधुर माध्यम है। प्रतिदिन सुबह या किसी भी शुभ अवसर पर इस भजन का श्रद्धा और विश्वास के साथ गायन करने से मन को शांति, कार्यों में सफलता और परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। विशेष रूप से बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले इस भजन का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।







