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सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त बिक्री कर पर राज्यों का अधिकार बरकरार रखा

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admin
4 नवंबर 2026 | 02:14 pm IST
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नई दिल्ली, 4 नवंबर। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वर्ष 1974 में संविधान पीठ द्वारा दिया गया वह फैसला अब भी प्रभावी है, जिसमें राज्यों के मौजूदा बिक्री कर की दर के आधार पर अतिरिक्त बिक्री कर या अधिभार लगाने के अधिकार को बरकरार रखा गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर दोबारा फैसला देने की आवश्यकता नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि करीब 27 साल पहले उसके पास भेजे गए कानूनी सवाल पर अब निर्णय की जरूरत नहीं रह गई है। इसकी वजह यह है कि संबंधित वैधानिक प्रावधानों में बदलाव या संशोधन हो चुका है और देश में माल एवं सेवा कर (GST) कानून लागू हो गया है।

कानूनी सवाल अब अकादमिक रह गया: सुप्रीम कोर्ट

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने और पांच अन्य न्यायाधीशों की ओर से फैसला लिखते हुए कहा कि संदर्भित सवाल का अब कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह गया है और वह अकादमिक हो चुका है।

उन्होंने कहा कि सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा इस सवाल पर निर्णय किए जाने की जरूरत नहीं है और संदर्भ का जवाब इसी के अनुरूप दिया जाना चाहिए।

इस संविधान पीठ में न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन, न्यायमूर्ति एस. वी. भट्टी, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने अलग से सहमति वाला फैसला लिखा।

एस. कोदार मामले का फैसला अब भी प्रभावी

सुप्रीम कोर्ट ने नए सिरे से निर्णय देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि ‘एस. कोदार बनाम केरल राज्य’ (1974) मामले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का फैसला अब भी प्रभावी है।

उस फैसले में अतिरिक्त बिक्री कर को वैध ठहराया गया था। साथ ही, इस दलील को खारिज कर दिया गया था कि ऐसा कर लगाना कारोबारियों की आय पर कर लगाने के समान है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उस मामले में यह माना गया था कि देय बिक्री कर के प्रतिशत के आधार पर निर्धारित अतिरिक्त कर या अधिभार, बिक्री कर की दर में वृद्धि है। संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-2 की प्रविष्टि 54 के तहत वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर ऐसा कर लगाया जा सकता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिभार लगाने के लिए राज्य विधानसभाओं की विधायी क्षमता का निर्धारण एस. कोदार मामले में तय किए गए कानूनी सिद्धांतों के आधार पर होगा।

ओडिशा बिक्री कर अधिनियम से जुड़ा है मामला

यह कानूनी संदर्भ ओडिशा बिक्री कर अधिनियम, 1947 की धारा 5ए को चुनौती दिए जाने से उठा था।

इस प्रावधान के तहत 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के बीच सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों पर 10 प्रतिशत और एक करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाले व्यापारियों पर 15 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त कर लगाने का प्रावधान था।

अपीलकर्ताओं ने सवाल उठाया था कि क्या राज्य विधानमंडल संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-2 की प्रविष्टि 54 के तहत ऐसा कर लगाने में सक्षम है।

बिक्री कर और आयकर के अधिकार क्षेत्र पर विवाद

अपीलकर्ताओं की दलील थी कि अतिरिक्त बिक्री कर वास्तव में कारोबारियों की आय पर कर लगाने के समान है। ऐसे में यह संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-1 की प्रविष्टि 82 के तहत संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।

वहीं, सूची-2 की प्रविष्टि 54 राज्यों को वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर कर लगाने का अधिकार देती है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एस. कोदार मामले में तय कानूनी सिद्धांत अब भी लागू हैं। हालांकि, इस मामले में विस्तृत फैसला आना बाकी है।