भारतीय संस्कृति और जनमानस में ‘रामायण’ केवल एक ग्रंथ या कहानी नहीं, बल्कि जीवन जीने के आदर्शों, मर्यादा और शाश्वत मूल्यों का ऐसा दस्तावेज है, जो पीढ़ियों से हमारा मार्गदर्शन करता आया है। ऐसे महान महाकाव्य को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करना किसी भी फिल्मकार के लिए बड़ी चुनौती है। निर्देशक नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण भाग 1’ इसी चुनौती को स्वीकार करती है।
यह फिल्म आधुनिक तकनीक, शानदार विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और गहरी मानवीय भावनाओं के माध्यम से इस कालजयी गाथा को नए सिनेमाई अंदाज में पेश करती है। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म केवल पौराणिक घटनाओं का सिलसिला नहीं है, बल्कि सत्ता, महत्वाकांक्षा, प्रेम, कर्तव्य, त्याग और धर्म के बीच के संघर्ष को भी प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है।
फिल्म की जानकारी
फिल्म का नाम: रामायण भाग 1
क्रिटिक्स रेटिंग: 4/5
रिलीज की तारीख: 5 नवंबर, 2026
निर्देशक: नितेश तिवारी
जॉनर: महाकाव्य ड्रामा
फिल्म की कहानी: रावण के उत्थान से राम के वनवास तक
वाल्मीकि रामायण के मूल सार पर आधारित फिल्म की शुरुआत देवताओं और असुरों के बीच प्राचीन संघर्ष से होती है। असुरों की पराजय और लंका में उनके अस्तित्व की पुनर्स्थापना की घटनाएं अंततः रावण के उदय की पृष्ठभूमि तैयार करती हैं।
यश द्वारा निभाया गया रावण का किरदार केवल पारंपरिक खलनायक तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे महत्वाकांक्षी शासक की कहानी प्रस्तुत करता है, जो कठोर तपस्या, असाधारण बुद्धिमत्ता और अपार शक्ति के बल पर तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहता है।
रावण की तपस्या, भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करना, देवराज इंद्र को पराजित करना और कुबेर से लंका छीनना जैसे प्रसंग फिल्म के शुरुआती हिस्से में ही इसके विशाल पौराणिक संसार को स्थापित कर देते हैं।
इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है, जहां भगवान विष्णु राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम के रूप में अवतार लेते हैं। फिल्म में राम के बाल्यकाल, उनकी शालीनता, शिक्षा, शस्त्र विद्या और उन संस्कारों को विस्तार से दिखाया गया है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।
ऋषि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण की यात्रा, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और मिथिला में माता सीता के स्वयंवर के प्रसंग कहानी को आगे बढ़ाते हैं। राम और सीता का विवाह केवल दो व्यक्तियों या राजवंशों का मिलन नहीं, बल्कि आने वाली कठिन परीक्षाओं के लिए उनके भावनात्मक और आध्यात्मिक संबंधों की नींव भी है।
कहानी का सबसे भावुक मोड़ तब आता है, जब रानी कैकेयी राजा दशरथ को उनके पुराने वचनों की याद दिलाकर भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्षों के वनवास की मांग करती हैं। बिना किसी विरोध या द्वेष के राम अपने पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए अयोध्या छोड़ने का निर्णय लेते हैं। माता सीता और लक्ष्मण भी इस कठिन यात्रा में उनके साथ चल पड़ते हैं।
दूसरी ओर, लंका में सत्ता संघर्ष, पारिवारिक षड्यंत्र और शूर्पणखा की महत्वाकांक्षाएं घटनाओं को नया मोड़ देती हैं। शूर्पणखा के अपमान और उसके बाद पैदा हुए क्रोध का परिणाम अंततः सीता हरण के रूप में सामने आता है।
फिल्म का पहला भाग इसी महत्वपूर्ण मोड़ पर समाप्त होता है। राम और रावण के बीच होने वाला महायुद्ध अभी बाकी है, लेकिन निर्देशक ने इस निर्णायक संघर्ष की पृष्ठभूमि और दोनों पक्षों की मानसिक स्थिति को मजबूती से तैयार किया है।
निर्देशन: भावनाओं और भव्यता का संतुलन
नितेश तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत करना था, जिसे भारतीय दर्शक पहले से अच्छी तरह जानते हैं। रामायण के पात्र और घटनाएं हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं। इसलिए केवल पुरानी घटनाओं को दोहराना पर्याप्त नहीं था, बल्कि उन्हें नया सिनेमाई अनुभव देना भी जरूरी था।
‘दंगल’ जैसी फिल्म में पारिवारिक भावनाओं और संघर्षों को प्रभावी ढंग से दिखाने वाले नितेश तिवारी ने इस बार एक विशाल पौराणिक संसार की जिम्मेदारी संभाली है। उनकी सबसे बड़ी सफलता यह है कि फिल्म के भव्य पैमाने के बावजूद मानवीय रिश्तों को नजरअंदाज नहीं किया गया।
राम और लक्ष्मण के बीच आत्मीयता, राम और कैकेयी के भावनात्मक संवाद, राम-सीता के रिश्ते की कोमलता और परशुराम के साथ राम की मुलाकात जैसे दृश्य फिल्म के भावनात्मक पक्ष को मजबूत बनाते हैं।
लेखक श्रीधर राघवन और नितेश तिवारी ने कहानी को गहराई देने का प्रयास किया है। फिल्म में केवल राम के जीवन को ही नहीं, बल्कि रावण के व्यक्तित्व और उसके उत्थान के पीछे की परिस्थितियों को भी स्थान दिया गया है। इससे कहानी के दोनों पक्षों को समझने का अवसर मिलता है।
हालांकि, विस्तृत कहानी कहने के कारण कुछ हिस्से थोड़े धीमे महसूस होते हैं। इसके बावजूद निर्देशक का धैर्य और कहानी को विस्तार देने का तरीका फिल्म को अलग पहचान देता है।
रामायण दर्शकों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा विषय है। इसलिए इसके पात्रों, घटनाओं और मूल भावनाओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना बेहद जरूरी है। फिल्म में नितेश तिवारी इस जिम्मेदारी को लेकर सजग दिखाई देते हैं।
उन्होंने पौराणिक घटनाओं के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए शानदार सिनेमैटोग्राफी और विजुअल्स के जरिए उन्हें नया सिनेमाई रूप देने की कोशिश की है। रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर कहानी की मूल भावना से अनावश्यक छेड़छाड़ करने से भी परहेज किया गया है।
तकनीकी पक्ष: VFX और सिनेमैटोग्राफी की शानदार प्रस्तुति
‘रामायण भाग 1’ की सबसे बड़ी खूबियों में इसका तकनीकी पैमाना शामिल है। प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, विजुअल इफेक्ट्स और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर एक ऐसा संसार तैयार करते हैं, जो दर्शकों को अलग ही दौर में ले जाता है।
अयोध्या की भव्यता, मिथिला की सुंदरता, लंका के विशाल महल, जंगल और युद्ध के दृश्य फिल्म के विजुअल कैनवास को समृद्ध बनाते हैं। हर स्थान की अपनी अलग पहचान है। लंका को सोने, शक्ति और वैभव का प्रतीक दिखाया गया है, जबकि अयोध्या में अनुशासन, संस्कृति और शांति की झलक मिलती है।
DNEG के विजुअल इफेक्ट्स फिल्म की प्रमुख ताकतों में शामिल हैं। भव्य सेट, दिव्य अस्त्र-शस्त्र, युद्ध के दृश्य और पौराणिक नजारे बड़े पर्दे पर प्रभावशाली अनुभव देते हैं। रावण से जुड़े दृश्य, खासकर रावण और जटायु के बीच का टकराव, तकनीकी प्रस्तुति के लिहाज से खास ध्यान आकर्षित करते हैं।
हालांकि, कुछ दृश्यों में CGI थोड़ा बनावटी महसूस हो सकता है। इसके बावजूद फिल्म की दुनिया का विशाल पैमाना इन कमियों को काफी हद तक संभाल लेता है।
पंकज कुमार और महेश लिमये की सिनेमैटोग्राफी ने फिल्म की भव्यता को खूबसूरती से कैमरे में उतारा है। अलग-अलग स्थानों, महलों और प्राकृतिक दृश्यों में रंगों का इस्तेमाल कहानी के भावनात्मक माहौल के अनुरूप है। कॉस्ट्यूम और सेट डिजाइन भी फिल्म के पौराणिक वातावरण को मजबूत बनाते हैं।
ए.आर. रहमान और हंस जिमर का संगीत बना आकर्षण
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी ए.आर. रहमान और हंस जिमर ने संभाली है। दोनों की अलग-अलग संगीत शैलियां फिल्म को एक खास पहचान देती हैं।
गाने कहानी के भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं को मजबूत बनाते हैं, जबकि बैकग्राउंड स्कोर संघर्ष, तनाव और महत्वपूर्ण घटनाओं के दौरान दृश्यों का प्रभाव बढ़ाता है।
कई मौकों पर संगीत केवल कहानी के साथ चलता हुआ नहीं लगता, बल्कि सीधे दर्शकों की भावनाओं से जुड़ जाता है।
फिल्म की एडिटिंग भी सराहनीय है। तीन घंटे से अधिक लंबी होने के बावजूद फिल्म ज्यादातर समय दर्शकों का ध्यान बनाए रखती है। हालांकि, कुछ हिस्सों को थोड़ा छोटा किया जा सकता था, लेकिन भव्य दृश्य और कहानी का विस्तार दर्शकों को बांधे रखते हैं।
फिल्म के विजुअल्स इतने प्रभावशाली हैं कि कई बार दर्शक स्क्रीन पर मौजूद छोटी-छोटी बारीकियों को देखने के लिए भी आकर्षित होते हैं। रामायण की कहानी पहले भी कई बार पर्दे पर दिखाई जा चुकी है, लेकिन इसका नया विजुअल ट्रीटमेंट परिचित घटनाओं को अलग अनुभव देता है। खासकर नई पीढ़ी के दर्शकों को यह महाकाव्य समझने और उससे जुड़ने का नया अवसर दे सकता है।
अभिनय: रणबीर कपूर से यश तक सभी ने छोड़ी छाप
फिल्म की कास्टिंग और कलाकारों का अभिनय इसकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर ने अपने अभिनय का एक अलग पक्ष प्रस्तुत किया है। उनके चेहरे पर शांति, धैर्य, करुणा और गरिमा साफ दिखाई देती है।
रणबीर ने राम के किरदार को अनावश्यक नाटकीय बनाने के बजाय संयमित अभिनय के जरिए जीवंत किया है। कैकेयी के साथ भावनात्मक दृश्य और वनवास स्वीकार करने वाला प्रसंग विशेष रूप से प्रभावशाली है। उन्होंने राम की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं के बीच अच्छा संतुलन बनाया है।
रावण के रूप में यश ने दमदार प्रदर्शन किया है। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी और संवाद अदायगी प्रभाव छोड़ती है। उन्होंने रावण को केवल क्रूर और अहंकारी शासक के रूप में नहीं, बल्कि महत्वाकांक्षी, बुद्धिमान और सत्ता की तीव्र इच्छा रखने वाले व्यक्तित्व के रूप में पेश किया है।
सीता के रूप में साई पल्लवी का अभिनय स्वाभाविक और विश्वसनीय है। उनके किरदार में गरिमा, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास दिखाई देता है। उन्होंने सीता को केवल आदर्श पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि विचारों और आंतरिक शक्ति से भरपूर महिला के रूप में प्रस्तुत किया है।
लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे ने अच्छा प्रदर्शन किया है। राम के प्रति उनका समर्पण, भाई के साथ सहज बातचीत और जरूरत पड़ने पर उनका आक्रोश किरदार को प्रभावशाली बनाता है। उनके अभिनय में हल्का हास्य भी है, जो गंभीर कहानी के बीच दर्शकों को राहत देता है।
शूर्पणखा के रूप में रकुल प्रीत सिंह प्रभावशाली नजर आती हैं। स्क्रीन पर सीमित समय मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। लारा दत्ता ने कैकेयी के बदलते भावनात्मक उतार-चढ़ाव को अच्छे ढंग से निभाया है, जबकि राजा दशरथ के रूप में अरुण गोविल कहानी को अतिरिक्त भावनात्मक गहराई देते हैं।
अनुपम खेर की आवाज जटायु के किरदार को अलग पहचान देती है। जटायु से जुड़ा अंतिम दृश्य विशेष रूप से भावुक करने वाला है। भरत के रूप में आदिनाथ कोठारे और विद्युतजिह्वा के रूप में विवेक ओबेरॉय ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। वहीं, मारीच के रूप में सौरभ सचदेवा अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।
फिल्म की खूबियां: क्या बनाता है इसे खास?
‘रामायण भाग 1’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जानी-पहचानी कहानी को भी दिलचस्प बनाए रखने में सफल दिखाई देती है। फिल्म केवल भव्य सेट और विजुअल इफेक्ट्स पर निर्भर नहीं करती, बल्कि किरदारों के भावनात्मक सफर को भी पर्याप्त जगह देती है।
फिल्म के कुछ प्रमुख आकर्षण इस प्रकार हैं:
राम और लक्ष्मण के बीच भावनात्मक जुड़ाव।
राम और सीता के रिश्ते की आत्मीयता।
राम और कैकेयी के बीच प्रभावशाली संवाद।
रावण के उत्थान और महत्वाकांक्षा की कहानी।
ए.आर. रहमान और हंस जिमर का संगीत।
शानदार सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन।
बड़े पर्दे के लिए तैयार किए गए भव्य विजुअल इफेक्ट्स।
फिल्म की एक और खासियत अच्छाई और बुराई के संघर्ष को प्रस्तुत करने का तरीका है। यह संघर्ष केवल शारीरिक युद्ध तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विचारों, इच्छाओं और अलग-अलग विकल्पों के टकराव के रूप में भी सामने आता है। इससे कहानी को अतिरिक्त गहराई मिलती है।
फिल्म की कमियां: कहां रह गई थोड़ी कमी?
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी लंबाई है। तीन घंटे से अधिक का रनटाइम कुछ दर्शकों को थोड़ा थका सकता है। कहानी के कुछ हिस्सों को और कसावट के साथ प्रस्तुत किया जा सकता था।
इसके अलावा, कुछ बड़े जीवों और पृष्ठभूमि के दृश्यों में डिजिटल इफेक्ट्स को और बेहतर बनाया जा सकता था। कुछ स्थानों पर CGI वास्तविकता से थोड़ा दूर महसूस होता है।
हालांकि, ये कमियां फिल्म के समग्र अनुभव को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं। इसका विशाल कैनवास, शानदार संगीत, दमदार अभिनय और भावनात्मक दृश्य काफी हद तक इन कमियों की भरपाई करते हैं।
अंतिम निष्कर्ष: क्या ‘रामायण भाग 1’ देखने लायक है?
नितेश तिवारी की ‘रामायण भाग 1’ केवल एक पौराणिक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय महाकाव्य को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक महत्वाकांक्षी सिनेमाई प्रयास है। इसकी सबसे बड़ी खासियत भव्य दृश्यों और मानवीय भावनाओं के बीच बनाया गया संतुलन है।
रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार को संयम और गरिमा के साथ निभाया है। यश रावण के रूप में दमदार छाप छोड़ते हैं, जबकि साई पल्लवी सीता के किरदार में स्वाभाविक शालीनता और संवेदनशीलता लेकर आती हैं।
कहानी कुछ जगह धीमी जरूर पड़ती है और कुछ विजुअल इफेक्ट्स में सुधार की गुंजाइश भी है। इसके बावजूद शानदार संगीत, बेहतरीन अभिनय, भावनात्मक दृश्य और विशाल सिनेमाई संसार फिल्म को खास बनाते हैं।
यह फिल्म उन दर्शकों के लिए भी खास हो सकती है, जो बचपन से रामायण की कथा सुनते और देखते आए हैं। उन्हें परिचित प्रसंगों को एक नए सिनेमाई नजरिए से देखने का अवसर मिलता है।
अगर आपको भारतीय महाकाव्य, भव्य फिल्में और भावनाओं से भरपूर कहानियां पसंद हैं, तो ‘रामायण भाग 1’ आपके लिए एक आकर्षक सिनेमाई अनुभव हो सकती है। IMAX और 3D में इसकी भव्यता का अनुभव और भी प्रभावशाली हो सकता है।
कुल मिलाकर, ‘रामायण भाग 1’ भव्यता, भावुकता और आधुनिक तकनीक का ऐसा संगम है, जो भारतीय महाकाव्य को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
क्रिटिक्स रेटिंग: 4/5






