उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह चुनाव सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश में सत्ता बरकरार रखना पार्टी के लिए अहम है। हालांकि, चुनाव से पहले बीजेपी के सामने कई चुनौतियां भी हैं। युवाओं में बढ़ती बेचैनी, बेरोजगारी और जातिगत मुद्दे पार्टी के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
ऐसे में उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी या उसे बरकरार रखना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी। पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर जनसंपर्क अभियान तेज कर चुके हैं।
योगी आदित्यनाथ की पहल
बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता है। पार्टी के मुताबिक, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और विश्वास अब भी मजबूत है। यही वजह है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और चेहरे के आसपास तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
योगी सरकार चुनाव से पहले ऐसी योजनाओं और फैसलों पर भी जोर दे रही है, जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। इनमें करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा तथा उन्हें विभिन्न लाभ उपलब्ध कराने की पहल शामिल है।
इसके अलावा सरकार ने छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का फैसला किया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की आय बढ़ाने की घोषणा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
BJP की रणनीति में योगी का चेहरा
यह भी सच है कि बीजेपी के भीतर योगी आदित्यनाथ को लेकर हमेशा एक जैसी राय नहीं रही है। इसके बावजूद वह दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं और पार्टी तीसरे कार्यकाल के लिए भी उनके नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने पर विचार कर सकती है।
इसकी एक बड़ी वजह योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्व की राजनीति में मजबूत पहचान है। जातिगत मुद्दों के बीच बीजेपी उन्हें हिंदुत्व के प्रमुख चेहरे के तौर पर पेश कर सकती है। पार्टी को लगता है कि विपक्ष अगर चुनाव में जातीय समीकरणों को प्रमुख मुद्दा बनाता है, तो योगी का चेहरा उसके सामने एक अलग राजनीतिक नैरेटिव खड़ा कर सकता है।
कानून-व्यवस्था भी बड़ा फैक्टर
योगी आदित्यनाथ की सरकार की सबसे प्रमुख पहचान कानून-व्यवस्था को लेकर रही है। बीजेपी को उम्मीद है कि यह मुद्दा खासकर महिला मतदाताओं के बीच पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में मदद कर सकता है।
इसके साथ ही पार्टी को यह भी उम्मीद है कि सवर्ण मतदाताओं के बीच अगर किसी तरह की नाराजगी है, तो योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व उसे कम करने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि 2027 के चुनाव में बीजेपी उनके चेहरे को महत्वपूर्ण भूमिका देने की तैयारी कर सकती है।
115 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान वे विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के साथ-साथ विपक्ष पर राजनीतिक निशाना साधते भी नजर आ रहे हैं।
मई से अब तक योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 75 में से 44 से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान उन्होंने 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया है।
इन 115 विधानसभा सीटों में करीब 58 फीसदी सीटें ऐसी हैं, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को बढ़त मिली थी। यही वजह है कि बीजेपी ने इन सीटों पर अभी से अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है।
2024 में सपा-कांग्रेस को मिली थी बढ़त
2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में सपा-कांग्रेस गठबंधन को 67 सीटों पर बढ़त मिली थी। इनमें समाजवादी पार्टी 54 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, जबकि कांग्रेस को 13 सीटों पर बढ़त मिली।
वहीं बीजेपी 47 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी और उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को एक सीट पर बढ़त मिली थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में क्या था समीकरण?
2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना करें तो इन 115 सीटों में बीजेपी ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अपना दल (सोनेलाल) ने तीन और निषाद पार्टी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी को 33 सीटें मिली थीं। उस समय उसके सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने क्रमशः तीन और दो सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही थी।
43 लोकसभा सीटों पर भी नजर
इन 115 विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत 43 लोकसभा सीटें आती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इनमें से 21 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी, जबकि तीन सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने कुल 19 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।
कांग्रेस ने रायबरेली, सहारनपुर और बाराबंकी में जीत दर्ज की थी। वहीं समाजवादी पार्टी के खाते में मैनपुरी, इटावा, आजमगढ़, फिरोजाबाद, रामपुर, गाजीपुर, फतेहपुर, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, कैराना और जालौन जैसी प्रमुख सीटें गई थीं।
बीजेपी ने आगरा, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, कुशीनगर, पीलीभीत, हाथरस, गौतम बुद्ध नगर, देवरिया, अलीगढ़, झांसी और महाराजगंज जैसी सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने बागपत और बिजनौर में जीत हासिल की थी।
2027 के लिए क्या है बीजेपी की चुनौती?
आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी के सामने चुनौती सिर्फ सत्ता विरोधी माहौल से निपटने की नहीं है, बल्कि उसे युवाओं, रोजगार और जातीय समीकरणों के साथ-साथ उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान देना होगा, जहां 2024 में विपक्षी गठबंधन मजबूत रहा था।
ऐसे में योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के दौरे, विकास परियोजनाओं पर जोर और जनसंपर्क अभियान को 2027 की चुनावी रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि बीजेपी योगी के चेहरे, हिंदुत्व, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों के सहारे चुनावी समीकरणों को किस तरह अपने पक्ष में करती है।







