Man To Tera Hi Bhajan Kare:‘मन तो तेरा ही भजन करे’ भगवान विष्णु और सांवरिया के प्रति भक्ति और समर्पण से जुड़ा सुंदर भजन है। इस भजन को भगवान की पूजा-अर्चना के दौरान गाया या सुना जा सकता है। इसके शब्द भक्त के मन में प्रभु के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना जगाते हैं।
मन तो तेरा ही भजन करे
मन तो तेरा ही भजन करे,
हीरे गुरुदेव सांवरिया मेरे।
गुरुदेव सांवरिया मेरे,
घनश्याम सांवरिया मेरे।।
अनोखा बाग
एक बाग मैंने ऐसा देखा,
न फूल न पत्ते।
मैंने तोड़ अमर फल खाए रे,
गुरुदेव सांवरिया मेरे।।
अनोखा ताल
एक ताल मैंने ऐसा देखा,
न कुआँ न पानी।
मैंने मलमल काया धोई रे,
गुरुदेव सांवरिया मेरे।।
नंदलाल की लीला
एक महल मैंने ऐसा देखा,
न राजा न रानी।
नंदलाल खेलते देखे रे,
गुरुदेव सांवरिया मेरे।।
छप्पन भोग की भक्ति
एक रसोई मैंने ऐसी देखी,
न दाल न आटा।
मैंने छत्तीस भोग लगाए रे,
गुरुदेव सांवरिया मेरे।।
भजन-कीर्तन की महिमा
एक भवन मैंने ऐसा देखा,
न ढोलक न चिमटा।
मैंने भजन-कीर्तन गाए रे,
गुरुदेव सांवरिया मेरे।।
गुरुदेव सांवरिया मेरे,
घनश्याम सांवरिया मेरे।।
भजन का भाव
यह भजन भक्त और भगवान के बीच प्रेम, आस्था और समर्पण की भावना को दर्शाता है। इसमें प्रभु की लीलाओं और भक्ति के माध्यम से मन को भगवान के चरणों में लगाने का संदेश मिलता है। पूजा, भजन-कीर्तन या आध्यात्मिक वातावरण में इस भजन का गायन मन को शांति और भक्ति से भर सकता है।







